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Sunday, 1 April 2018

Gahari nind aane ke upay


  • गहरी नींद के लिए  आसान घरेलु उपाय |
  •  Gahari nind aane ke upay


  • अच्छी और गहरी नींद के लिए :
  • Achi Neend Ke Liye Kya Kare

आयुर्वेद के अनुसार जिन व्यक्तियों को रात में गहरी नींद आती है तथा वह सुबह के समय 4 बजे अपना बिस्तर छोड़ देते हैं तो इससे उनके शरीर की सभी धातुएं साम्यावस्था में रहती हैं। उन्हें किसी भी प्रकार का आलस्य नहीं होता है तथा उनका शरीर हृष्ट-पुष्ट रहता है। इससे उनके शरीर की सुन्दरता बढ़ती है, उत्साह बढ़ता है तथा उनकी जठराग्नि प्रदीप्त होती है और उन्हें भूख खुलकर लगती है।



यदि हम केवल कार्य ही करते रहें और नींद न लें तो एक समय ऐसा आएगा कि हम शारीरिक और मानसिक रूप से किसी भी कार्य को करने के अयोग्य हो जाएंगे। ऐसी दशा में या तो हम पागल हो जाएंगे अथवा मर जाएंगे। महिलाएं अपने बच्चों के सो जाने पर जगाकर दूध और भोजन इसलिए कराती हैं कि उनके बच्चे भूखे सो गये हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम होता है कि उनके भूख और भोजन से भी अधिक लाभकारी निद्रा होती है। इसी प्रकार छात्र-छात्राएं विभिन्न तरीकों से अपनी नींद को त्यागकर रात भर अध्ययन करते रहते हैं। ऐसा करने से उन विद्यार्थियों की आंखें दुर्बल हो जाती हैं और उनका मस्तिष्क भी कुंठित हो जाता है। इससे उनका प्राकृतिक स्वास्थ्य नष्ट हो जाता है। नींद के सम्बन्ध में एक कहावत प्रसिद्ध है कि वे व्यक्ति बहुत कुछ कर सकते हैं जो खूब अच्छी प्रकार से सोना जानते हैं।


  • गहरी नींद लाने के सरल उपाय :

1• नियमित रूप से व्यायाम करने से भी हमें गहरी नींद आती है जो कि हमारे शरीर के लिए अधिक उपयोगी होती है।

2• जो व्यक्ति अधिक परिश्रम करते हैं उन्हें हमेशा गहरी नींद आती है जबकि आलसी और निठल्ले व्यक्तियों को नींद नहीं आती है और वे रातभर करवटे बदलते रहते हैं।

3• हमें प्रतिदिन प्रसन्न और शांत मन से सोना चाहिए। इससे हमें गहरी नींद आती है।

4• हमें सूर्यास्त होने से पहले ही रात्रि का भोजन कर लेना चाहिए ताकि सोने से पहले हमारा भोजन पूर्णरूप से पच चुका हो। इस प्रकार का नियम रखने से हमें गहरी नींद आती है। बिलकुल खाली पेट और अधिक पेट भरा होने पर अच्छी नींद नहीं आती है। सोने से पहले दूध पीने से भी अच्छी नींद आती है।

5• गहरी नींद के लिए प्रतिदिन हमें शौच के बाद ठंडे पानी से अपने गुप्तांगों, हाथ-पैरों और मुंह को धोकर सोना चाहिए।

6• हमारे सोने की जगह शांत-स्वच्छ और हवादार होनी चाहिए तथा बिस्तर भी साफ-सुथरा होना चाहिए। शांत और अंधेरे स्थान में सोने से भी गहरी नींद आती है।

7• सोते समय मनुष्य की स्थिति का उसके स्वास्थ्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है वैसे तो जिस व्यक्ति को जिस करवट सोना अच्छा लगता है उसे उसी करवट ही सोना चाहिए। किंतु प्रायः चित्त होकर सोने से नींद में स्वप्न अधिक आते हैं। छाती पर हाथों को रखकर उत्तान सोना तो बिल्कुल ही खराब है। बाईं करवट सोना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इससे श्वासनली सीधी रहती है और शरीर में प्राणवायु का संचार बिना किसी रोक-टोक के होता रहता है। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि शरीर के बाईं ओर की नाड़ी को इड़ा तथा दाहिनी ओर की नाड़ी को पिंगला कहते हैं। इड़ा नाड़ी में चन्द्रमा की तथा पिंगला नाड़ी से सूर्य की शक्ति प्राप्त होती है। इस प्रकार चन्द्रमा की ठंडक के साथ सूर्य की गर्मी मिलने से मनुष्य प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहता है। यही कारण है कि बाईं करवट सोने वाले व्यक्ति काफी लम्बी उम्र वाले होते हैं। फिर भी जिन्हें हृदय सम्बंधी रोग हो तो उन्हें बाईं ओर की करवट न सोकर दाहिनी ओर की करवट लेकर सोना ही अधिक लाभकारी होता है।

8• क्रोध, घृणा, प्रेम, चिंता, अधिक भोजन, अधिक परिश्रम, रोग, भय, चाय, जर्दा, काफी, शोरगुल तथा सोने के कमरे में तेज रोशनी होने से नींद कम आती है। जहां तक हो सके हमें इससे बचना चाहिए।

9• बिस्तर पर लेटने के बाद कंघी से बालों को धीरे-धीरे संवारने से जल्द और गहरी नींद आती है।

10• हमें प्रतिदिन अपने मन को एकाग्रचित रखने के बाद ही सोना चाहिए। ऐसा करने हमें बहुत अच्छी नींद आती है। सोने से पहले हमें कुछ देर तक अवश्य टहलना चाहिए। इस दौरान हमें मस्तिष्क पर बिल्कुल भी जोर नहीं देना चाहिए।

11• नींद लेने के लिए हमें भूलकर भी नींद की गोलियों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि नींद की गोलियों का हमारे शरीर पर घातक प्रभाव होता है।

12• सोने से पहले मंत्र “सोऽहम्´´ का जाप करने से भी अच्छी नींद आती है। इससे 10 मिनट के अन्दर ही नींद आ जाती है। इस मंत्र के उच्चारण के लिए सांस लेते समय “सो´´ और सांस को बाहर निकालते समय “हम“ कहना चाहिए।

13• बूढ़े व्यक्तियों को 24 घंटों में केवल एक बार भोजन करने से उन्हें अच्छी नींद आती है।

14• सोते समय सिर को ऊंचा और बाकी धड़ को नीचा रखना चाहिए। इससे गहरी और अच्छी नींद आती है। सिर को ऊंचा रखने के लिए सिर के नीचे तकिया रखना चाहिए।

15• सोने से पहले अपने दोनों पैरों को 5-10 मिनट तक हल्के गर्म पानी में रखते हैं। इससे मस्तिष्क में एकत्रित रक्त पैरों की तरफ उतर आएगा क्योंकि मस्तिष्क में अधिक रक्त होने के कारण गहरी नींद नहीं आती है। ऐसा करने से हमारा मस्तिष्क ठंडा हो जाता है जिससे अच्छी नींद आती है।

16• ठंडे पानी से स्नान करने के बाद गर्म कपडे़ पहनकर सोने से भी अच्छी नींद आती है।सोते समय हमें हल्के कपड़े पहनने चाहिए।

17• सोते समय दक्षिण या पूर्व की ओर सिर करके ही सोना चाहिए |

18. केले की चाय के सेवन से

19. दालचीनी व दूध के सेवन से

20. मेथी के दाने को हाथ के दोनों अगूंठे के नाखून के पास चिपकाने से

21. पँचगगव्य धृत नाक में डालने से

नींद लेने का निर्धारित समय :

आमतौर पर प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को 7-8 घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए। जिस प्रकार प्रत्येक प्राणी के लिए भोजन की मात्रा निर्धारित करना आसान नहीं होता है उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के लिए नींद का निश्चित समय निर्धारित करना मुश्किल नहीं होता है। आमतौर पर देखा जाता है कि कुछ व्यक्तियों की नींद बहुत जल्द ही पूरी हो जाती है तो कुछ व्यक्ति पूरी रात सोते हैं परन्तु इसके बावजूद भी उनकी नींद पूरी नहीं होती है। नवजात शिशु प्राकृतिक रूप से अधिक सोता है।

इसका कारण यह होता है कि उसे अपने शरीर की वृद्धि और विकास के लिए अधिक नींद की आवश्यकता होती है।

नवजात शिशु कम से कम 15-16 घंटे प्रतिदिन सोता है। वृद्धों, रोगियों, प्रसूता महिलाओं और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को सामान्य लोगों की तुलना में अधिक नींद की आवश्यकता होती है। महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा अधिक नींद की आवश्यकता होती है तथा गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक नींद लाभदायक होती है।


  • अधिक नींद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक:

आवश्यकता से अधिक नींद लेना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। अधिक सोने से उम्र घटती है। इसी प्रकार नींद पूरी किये बिना ही उठ जाना रोगों का कारण होता है। अधिक नींद लेने से हमारे शरीर में भारीपन आता है और शरीर में मोटापा बढ़ता है और आलस्य और सुस्ती भी आती है। हमें सोने के लिए अधिक समय पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि गहरी नींद के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि 4 घंटे की गहरी नींद 8 घंटे की स्वप्नयुक्त नींद से अच्छी होती है।

नींद न आने की बीमारी से हमेसा के लिए छुटकारा देगा यह 5 मिनट का चमत्कारिक प्रयोग | Anidra ka ilaj


  • परिचय


रात में नींद न आना अथवा रात को देर तक जगे रहने को अनिद्रा (Anidra)कहते हैं।

अनिद्रा (Anidra) का कारण :neend na aane ke karan

★ अनिद्रा रोग का खास कारण चिंता को माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति अति उत्तेजित है, अवसाद जैसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, कैफीन जैसे उत्तेजक पदार्थ लेता है, गंदे वातावतण में रहता है, ज्यादा मेहनत करता है, बासी और गरिष्ठ भोजन का सेवन करता है, धूम्रपान करता है, नींद की गोलियां लेता है, नशा ज्यादा करता है, तो उसे अनिद्रा का रोग हो सकता है। अनिद्रा रोग का एक कारण स्नायु-संस्थान की गड़बड़ी होना भी हो सकता है।


  • लक्षण-

★ आंखों का लाल होना, आंखों में नींद भरी होना, किसी भी काम में मन न लगना आदि अनिद्रा रोग के लक्षण होते हैं।


  • उपचार-

1 ★ अनिद्रा रोग को दूर करने के लिए सबसे पहले रोगी को अपनी नींद को पूरा करना चाहिए। रोगी को रात को जल्दी एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार करने के लिए हाथ की कलाई के पास तथा कंधे से छाती के पास के प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देसो जाना चाहिए, सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना चाहिए, हरी घास पर नंगे पांव चलना चाहिए, हल्के गुनगुने पानी से नहाना चाहिए, मन-मस्तिष्क को शांत रखना चाहिए। रोगी के स्नायु-संस्थान और पाचनतंत्र से सम्बन्धित केन्द्र बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए। अगर अनिद्रा रोग का कारण मनोवैज्ञानिक हो तो किसी अच्छे मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

2 ★ एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार करने के लिए हाथ की कलाई के पास तथा कंधे से छाती के पास के प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देने से तथा पैरों पर टखने से ऊपर और टखने के पास के प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देने से रोगी का अनिद्रा रोग धीरे-धीरे कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। प्रेशर रोगी की सहनशक्ति के अनुसार प्रतिदिन कुछ सेकेण्ड के लिए देना चाहिए।


3 ★ अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा मस्तिष्क, पाचनतंत्र तथा स्नायुसंस्थान से सम्बन्धित प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर कुछ दिनों तक प्रतिदिन कुछ मिनट के लिए 3 बार प्रेशर देने से अनिद्रा रोग ठीक हो जाता है। इसके अलावा चित्र में दिए गए प्रतिबिम्ब बिन्दुओं (जो कि पीठ की रीढ़ के हड्डी के दोनों तरफ हैं), पर नियमित रूप से रोजाना प्रेशर देने पर कुछ ही दिनों में अनिद्रा रोग ठीक हो जाता है। इस प्रकार प्रेशर देने से स्नायु-संस्थान के कार्य में सुधार हो जाता है जिसके फलस्वरूप अनिद्रा रोग दूर हो जाता है।

4★ अनिद्रा रोग का खास कारण चिंता को माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति अति उत्तेजित है, अवसाद जैसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, रात को सोने से पहले हाथ-पैरों के अंगूठे तथा अंगुलियों पर प्रेशर देने से नींद अच्छी आती है। इसके अलावा दाएं हाथ की अंगुलियों और बाएं हाथ की अंगुलियों को आपस में जोड़कर (जैसा कि चित्र  में दिया गया है ठीक उसी प्रकार करके) प्रेशर देने से अनिद्रा रोग दूर हो जाता है। इस प्रकार चिकित्सा करने से तनाव दूर होता है जिसके फलस्वरूप नींद अच्छी आती है।


5 ★ दोनों हाथों की कलाई के पास अनिद्रा को दूर करने के लिए जो प्रतिबिम्ब बिन्दु होता है (जैसा कि चित्र में दे रखा है) उस पर प्रेशर देने से अनिद्रा रोग दूर हो जाता है।


Kidney Stone gharelu nuskhe Hindi


  • पथरी के सबसे असरकारक 34 घरेलु नुस्खे
  • Kidney Stone gharelu nuskhe Hindi
  • पथरी के कारण लक्षण व सबसे प्रभावशाली आयुर्वेदिक नुस्खे :
  • Pathri ka Desi gharelu nuskhe






★ गुर्दे की पथरी भी पित्ताशय (वह स्थान जहां पित्त एकत्रित होती है) की पथरी के तरह बनती है।

★ जब कभी गुर्दे में कैल्शियम, फास्फेट व कार्बोनेट आदि तत्त्व इकट्ठा हो जाते हैं तो वह धीरे-धीरे पथरी का रूप धारण कर लेती

  • पथरी के सबसे असरकारक 34 घरेलु उपचार | Kidney Stone Treatment in Hindi

  • पथरी का कारण लक्षण व सबसे प्रभावशाली आयुर्वेदिक उपचार :
  • Pathri ka Desi gharelu nuskhe

★ गुर्दे की पथरी भी पित्ताशय (वह स्थान जहां पित्त एकत्रित होती है) की पथरी के तरह बनती है।

★ जब कभी गुर्दे में कैल्शियम, फास्फेट व कार्बोनेट आदि तत्त्व इकट्ठा हो जाते हैं तो वह धीरे-धीरे पथरी का रूप धारण कर लेती है।

★ जब तक शरीर के सभी गंदे तत्त्व मूत्र के साथ सामान्य रूप से निकलते रहते हैं तब तक सब कुछ ठीक रहता है लेकिन जब किसी कारण से मूत्र के साथ ये सभी तत्व नहीं निकलने पाते हैं तो ये सभी तत्व गुर्दे में एकत्रित होकर पथरी का निर्माण करने लगते हैं।

★ गुर्दे की पथरी बनने पर पेशाब करते समय तेज जलन व दर्द होता है।

  • पथरी होने का कारण : 
  • Pathari Hone ke Karan



★ जो स्त्री-पुरुष खान-पान में सावधानी नहीं रखते हैं उन्हें यह रोग होता है।

★ अधिक खट्ठे-मीठे, तेल के पदार्थ, गर्म मिर्च-मसाले आदि खाने के कारण गुर्दे की पथरी बनती है।

★ जो लोग इस तरह के खान पान हमेशा करते हैं उनके गुर्दो में क्षारीय तत्त्व बढ़ जाते हैं और उनमें सूजन आ जाती है।

★ कभी-कभी मौसम के विरुद्ध आहार खा लेने से भी गुर्दे की पथरी बन जाती है।

★ शुरू में यह पथरी छोटी होती है और बाद में धीरे-धीरे बड़ी हो जाती है।

  • पथरी होने के लक्षण : 




★ पथरी बनने के पश्चात मूत्र त्याग के समय जलन होती है।

★ कभी-कभी पेशाब करते समय इतना दर्द होता है कि रोगी बेचैन हो जाता है।

★ गुर्दे की पथरी नीचे की ओर चलती है और मूत्रनली में आती रहती है जिससे रोगी को बहुत दर्द होता है

  • पथरी का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार :
  • Pathari ka Ilaj gharelu nuskhe




1. कुल्थी : 250 ग्राम कुल्थी को साफ करके रात को 3 लीटर पानी में भिगो दें। सुबह फुली हुई कुल्थी को उसी पानी के साथ धीमी आग पर लगभग 4 घंटे तक पकाएं और जब 1 लीटर पानी रह जाए तो उतारकर इसमें 50 ग्राम देशी घी, सेंधानमक, कालीमिर्च, जीरा व हल्दी का छोंका लगाएं। यह भोजन के बाद सेवन करने से गुर्दे की पथरी गलकर निकल जाती है।

2. लहसुन : लहसुन की पुती के साथ 2 ग्राम जवाखार पीसकर रोगी को सुबह-शाम देने से गुर्दे की पथरी बाहर निकल जाती है।

3. पपीता : 6 ग्राम पपीते की जड़ को पीसकर 50 मिलीलीटर पानी में मिलाकर 21 दिन तक सुबह-शाम पीने से पथरी गल जाती है।

4. मेंहदी : 6 ग्राम मेंहदी के पत्तों को 500 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें। जब 150 मिलीलीटर पानी रह जाए तो छानकर 2-3 दिन पीने से गुर्दे का दर्द ठीक होता है।


5. मूली : मूली का 100 मिलीलीटर रस मिश्री मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करने से कुछ दिनों में ही गुर्दे की पथरी गलकर निकल जाती है और दर्द शान्त होता है।

6. मक्का : मक्के के भुट्टे के 20 ग्राम बालों को 200 मिलीलीटर पानी में उबालें और जब पानी केवल 100 मिलीलीटर बच जाए तो छानकर पीएं। इससे गुर्दे की पथरी का दर्द ठीक होता है।

7. तुलसी : 20 ग्राम तुलसी के सूखे पत्ते, 20 ग्राम अजवायन और 10 ग्राम सेंधानमक लेकर पॉउड़र बनाकर रख लें। यह 3 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से गुर्दे का तेज दर्द दूर होता है।

8. दालचीनी : दालचीनी का चूर्ण बनाकर 1 ग्राम पाउड़र पानी के साथ खाने से गुर्दे का दर्द दूर होता है।

9. खरबूजे : खरबूजे के बीजों को छीलकर पीसकर पानी में मिलाकर हल्का सा गर्म करके पीने से गुर्दो का दर्द खत्म होता है।

10. अजवायन : अजवायन का चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में पानी के साथ खाने से पथरी गलकर बाहर निकल जाती है।

11. चौलाई : प्रतिदिन चौलाई का साग बनाकर खाने से पथरी गलकर निकल जाती है।

12. करेला : करेले के 20 मिलीलीटर रस में शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से पथरी खत्म होकर पेशाब के रास्ते निकल जाती है। करेले की सब्जी बनाकर रोज खाने से पथरी खत्म होती है।

13. खीरा : खीरे का रस 150 मिलीलीटर प्रतिदिन 2-3 बार पीने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है।

14. जामुन : प्रतिदिन जामुन खाने से गुर्दे की पथरी धीरे-धीरे खत्म होती है।

15. सहजन : सहजन की सब्जी रोजाना खाने से गुर्दे की पथरी धीरे-धीरे पेशाब के रास्ते निकल जाती है और दर्द ठीक होता है।



16. जवाखार : गाय के दूध के लगभग 250 मिलीलीटर मट्ठे में 5 ग्राम जवाखार मिलाकर सुबह-शाम पीने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है।

* जवाखार और चीनी 2-2 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ खाने से पथरी टूट-टूटकर पेशाब के साथ निकल जाती है। इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम खाने से आराम मिलता है।

17. पालक : 100 मिलीलीटर नारियल का पानी लेकर, उसमें 10 मिलीलीटर पालक का रस मिलाकर पीने से 14 दिनों में पथरी खत्म हो जाती है।

* पालक के साग का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पथरी में लाभ मिलता है।

18. अजमोद : अजमोद के फल का चूर्ण 1 से 4 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से पथरी रोग में लाभ होता है। ध्यान रहे कि मिर्गी के रोगी और गर्भिणी को यह औषधि न दें।

19. पाठा : पाठा के जड़ के बारीक चूर्ण को गर्म पानी से छानकर रख लें। इस छाने हुए पानी को सुबह-शाम पीने से पूरा लाभ मिलता है।

20. चिरचिरी : चिरचिरी की जड़ 5 से 10 ग्राम या काढ़ा 1 से 50 मिलीलीटर सुबह-शाम मुलेठी, गोखरू और पाठा के साथ खाने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है। इसकी क्षार अगर भेड़ के मूत्र के साथ खाए तो पथरी रोग में ज्यादा लाभ मिलता है।




21. गोक्षुर : गोक्षुर के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन 2 बार खाने से पथरी खत्म होती है।

22. लकजन : लकजन की जड़ का काढ़ा 20 से 40 मिलीलीटर सुबह-शाम खाने से पेशाब की पथरी में लाभ मिलता है।

23. बड़ी इलायची : लगभग आधा ग्राम बड़ी इलायची को खरबूजे के बीज के साथ पीसकर पानी में घोटकर सुबह-शाम पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।

24. नारियल : नारियल की जड़ का काढ़ा 40 मिलीलीटर दिन में तीन बार पीने से पथरी व दर्द ठीक होता है।

25. बिजौरा नींबू : बिजौरा नींबू की जड़ 10 ग्राम को पीसकर प्रतिदिन सुबह-शाम पिलाने से पेशाब की पथरी खत्म होती है।

26. गुलदाउदी : 10 ग्राम सफेद गुलदाउदी को पीसकर मिश्री मिलाकर पीने से गुर्दे की पथरी का दर्द दूर होता है।

27. अनन्नास : अनन्नास खाने व रस पीने से पथरी रोग में बहुत लाभ होता है।

28. फिटकरी : भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम दिन में 3 बार रोगी को पानी के साथ सेवन कराने से रोग ठीक होता है।

29. अदरक : अदरक का रस 10 मिलीलीटर और भुनी हींग 120 ग्राम पीसकर नमक मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।

30. अजमोद : 25 ग्राम अजमोद को 500 मिलीलीटर पानी में उबालें और आधा रह जाने पर ठंड़ा करके आधा या 2 कप 3-3 घंटे के अन्तर पर रोगी को पिलाएं। इससे दर्द तुरन्त समाप्त हो जाता है।

31. कमलीशोरा : कमलीशोरा, गंधक और आमलासार 10-10 ग्राम अलग-अलग पीसकर मिला लें और हल्की आग पर गर्म करने के 1-1 ग्राम का आधा कप मूली के रस के साथ सुबह-शाम लेने से गुर्दे की पथरी में लाभ मिलता है।

32. काला जीरा : काला जीरा 20 ग्राम, अजवायन 10 ग्राम और काला नमक 5 ग्राम को एक साथ पीसकर सिरके में मिलाकर 3-3 ग्राम सुबह-शाम लेने से आराम मिलता है।

33. आलू : एक या दोनों गुर्दो में पथरी होने पर केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक मात्रा में पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियां और रेत आसानी से निकल जाती हैं। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो पथरी को निकालता है तथा पथरी बनने से रोकता है।

पथरी बन्ने के कारण व उससे छुटकारा पाने के असरकारक प्रयोग |

  • Kidney Stones: Causes,



शरीर में अम्लता बढने से लवण जमा होने लगते है और जम कर पथरी बन जाते है . शुरुवात में कई दिनों तक मूत्र में जलन आदि होती है , जिस पर ध्यान ना देने से स्थिति बिगड़जाती है

धूप में व तेज गर्मी में काम करने से व घूमने से उष्ण प्रकृति के पदार्थों के अति सेवन से मूत्राशय परगर्मी का प्रभाव हो जाता है, जिससे पेशाब में जलन होती है।

कभी-कभी जोर लगाने पर पेशाब होती है, पेशाब में भारी जलन होती है, ज्यादा जोर लगाने पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब होती है। इस व्याधि को आयुर्वेद में मूत्र कृच्छ कहा जाता है। इसका उपचारहै-



* खूब पानी पिए .

* कपालभाती प्राणायाम करें .

* हरी सब्जियां , टमाटर , काली चाय,चॉकलेट , अंगूर बीन्स , नमक , एंटासिड , विटामिन डी सप्लीमेंट कम ले

* रोजाना विटामिन बी-6 (कम से कम 10 मि.ग्रा. ) और मैग्नेशियम ले .

* यवक्षार ( जौ की भस्म ) का सेवन करें .

* मूली और उसकी हरी पत्तियों के साथ सब्जी का सुबह सेवन करें .

* 6 ग्राम पपीते को जड़ को पीसकर 50 ग्राम पानी मिलकर 21 दिन तक प्रातः और सायं पीने से पथरी गल जाती है।

* मेहंदी की छाल को उबाल कर पीने से पथरी घुल जाती है

* नारियल का पानी पीने से पथरी में फायदा होता है। पथरीहोने पर नारियल का पानी पीना चाहिए।

* 15 दाने बडी इलायची के एक चम्मच, खरबूजे के बीज की गिरी और दोचम्मच मिश्री, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम दो बार पीने से पथरी निकल जाती है।

* पका हुआ जामुन पथरीसे निजात दिलाने मेंबहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पथरी होने पर पका हुआ जामुन खाना चाहिए।

* बथुआ की सब्जी खाए .

* आंवला भी पथरी में बहुत फायदा करता है।आंवला का चूर्ण मूलीके साथ खाने से मूत्राशय की पथरी निकल जाती है।

* जीरे और चीनी को समान मात्रा में पीसकर एक-एक चम्मच ठंडे पानी से रोज तीन बार लेने से लाभ होता है और पथरी निकल जाती है।

* सहजन की सब्जी खानेसे गुर्दे की पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है। आम के पत्ते छांव में सुखाकर बहुत बारीक पीस लें और आठ ग्राम रोज पानी के साथ लीजिए, फायदा होगा ।

* मिश्री, सौंफ, सूखा धनिया लेकर 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर डेढ लीटर पानी में रात को भिगोकर रख दीजिए। अगली शाम को इनको पानी से छानकर पीस लीजिए और पानी में मिलाकर एक घोल बना लीजिए, इस घोल को पी‍जिए। पथरीनिकल जाएगी।

* चाय, कॉफी व अन्य पेय पदार्थ जिसमें कैफीन पाया जाता है, उन पेय पदार्थों का सेवन बिलकुल मत कीजिए।

* तुलसी के बीज का हिमजीरा दानेदार शक्कर व दूध के साथ लेने से मूत्र पिंड में फ़ंसी पथरी निकल जाती है।

* जीरे को मिश्री की चासनी अथवा शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है।

* बेल पत्थर को पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह काली मिर्च खाएं। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन ऐसे सात काली मिर्च तक पहुंचे।आठवें दिन से काली मिर्च की संख्या घटानी शुरू कर दें और फिर एक तक आ जाएं। दो सप्ताह के इस प्रयोग से पथरी समाप्त हो जातीहै। याद रखें एक बेल पत्थर दो से तीन दिन तक चलेगा

  • पित्त की पथरी के लिए 28 असरकारी घरेलू उपचार |
  • Best Natural Remedies for Gallstones in hindi



  • परिचय :



पित्ताशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता हैं) में कोई पदार्थ जब जमकर पथरी का रूप धारण कर लेती है तो उसे ही पित्त की पथरी कहते हैं। ये पथरी जब एक पित्ताशय में होती है। तब तक तो यह कोई दर्द नहीं करती मगर जब यह पित्त नली से निकलने लगती है तब यह बहुत दर्द करता है

  • कारण :

जब ज्यादा वसा से भरा पदार्थ यानी घी, मक्खन, तेल वगैरह से बने पदार्थ का सेवन करते हैं तो शरीर में कोलेस्ट्रोल, कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम फांस्फेट के अधिक बनने से पित्ताशय में पथरी का निर्माण होता है। रक्त विकृति के कारण छोटे बच्चों के शरीर में भी पथरी बन सकती है। पित्ताशय में पथरी की बीमारी से स्त्रियों को ज्यादा कष्ट होता है। 30 वर्ष से ज्यादा की स्त्रियां गर्भधारण के बाद पित्ताशय की पथरी से अधिक ग्रस्त होती हैं। कुछ स्त्रियों में पित्ताशय की पथरी का रोग वंशानुगत भी होता है। खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा ज्यादा होने पर कैल्शियम के मिलने से पथरी बनने लगती है।
  • लक्षण :

पेट के ऊपरी भाग में दायीं ओर बहुत ही तेज दर्द होता है और बाद में पूरे पेट में फैल जाता है। लीवर स्थान बड़ा और कड़ा और दर्द से भरा होता है। नाड़ी की गति धीमी हो जाती है। शरीर ठंड़ा हो जाता है, मिचली और उल्टी के रोग, कमजोरी (दुर्बलता), भूख की कमी और पीलिया रोग के भी लक्षण होते हैं। इसका दर्द भोजन के 2 घण्टे बाद होता है इसमें रोगी बहुत छटपटाता है।

भोजन तथा परहेज :

गाय का दूध, जौ, गेहूं, मूली, करेला, अंजीर्ण, तोरई, मुनक्का, परवल, पके पपीता का रस, कम खाना, फल ज्यादा खाना और कुछ दिनों तक रस आदि का प्रयोग करें।

चीनी और मिठाइयां, वसा और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें- इस रोग में कदापि सेवन न करें। तेल, मांस, अण्डा, लाल मिर्च, हींग, उड़द, मछली और चटपटे मसालेदार चीजें, गुड़, चाय, श्वेतसार और चर्बीयुक्त चीजें, खटाई, धूम्रपान, ज्यादा मेहनत और क्रोध आदि से परहेज करें।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. अजमोदा : पित्त की पथरी ( pitt ki pathri ) में अजमोदा फल का चूर्ण 1 ग्राम से 4 ग्राम सुबह-शाम देने से फायदा होता है। मगर यह मिर्गी और गर्भवती महिला को नहीं देना चाहिए

2. पथरचूर : पथरचूर का रस चौथाई से 5 मिलीलीटर सुबह-शाम खाने से धीरे-धीरे पथरी खत्म हो जाती है।


पाथरचूर का रस 5 से 6 बूंद शर्करा के साथ खाने से पथरी में लाभ होता है।

पथरचूर का रस 5 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम खाने से धीरे-धीरे पथरी खत्म हो जाती है।

3. मजीठा : मजीठा को कपड़े से छानकर 1 ग्राम को रोज 3 खाने से सभी तरह की पथरियां गलकर मूत्र के द्वारा बाहर निकल जाती हैं। इससे फायदा न होने पर ऑपरेशन क्रिया की राय ले सकते हैं।

4. छोटा गोखरू : छोटा गोखरू का चूर्ण 3 ग्राम से 6 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ खाने से और ऊपर से बकरी का दूध सिर्फ 7 दिनों तक पीने से ही पथरी दूर हो जाती है।

5. गोखरू : गोखरू के काढ़े में, कलमीसोरा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से 1.20 ग्राम सुबह-शाम पिलाने से पथरी रोग में लाभ होता है।

* गोखरू के बीजों के चूर्ण को शहद के साथ भेड़ के दूध में मिलाकर पिलाने से पथरी खत्म होकर निकल जाती है।


6. बड़ी इलायची : बड़ी इलायची लगभग आधा ग्राम को खरबूजे के बीज के साथ पीसकर खाने से पथरी रोग में फायदा होता है।

7. भटकटैया : भटकटैया, रेंगनीकांट की जड़ बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण करके 2 ग्राम सुबह-शाम मीठे दही के साथ मात्र 7 दिनों तक पीने से पथरी रोग में फायदा होता है।

8. धतूरे : धतूरे के बीज 0.06 से 0.12 ग्राम दही के साथ खाने से दर्द कम हो जाता है और उल्टी भी नहीं होती है। इसके प्रयोग से पहले धतूरे के बीज को 12 घंटे तक गाय के मूत्र में या दूध में उबालकर शोंधन कर लें। इससे पथरी में लाभ होगा।

9. सहजना : सहजना की जड़ की छाल का काढ़ा और हींग को सेंधानमक में मिलाकर सुबह-शाम खाने से पित्तपथरी में फायदा होता है।

10. अपामार्ग : पित्त की पथरी में अपामार्ग की जड़ 5 से 10 ग्राम कालीमिर्च के साथ या जड़ का काढ़ा कालीमिर्च के साथ 15 से 50 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम लेने से पथरी में लाभ होता है। काढ़ा अगर गरम-गरम ही लें तो लाभ होगा।

11. नारियल : नारियल के जड़ का काढ़ा 40 मिलीलीटर सुबह-शाम सेवन करने से पित्त की पथरी या किसी भी तरह की पथरी में लाभ होता है।

12. पालक : पालक के साग का रस 10 से 20 मिलीलीटर तक खाने से पित्त की पथरी या किसी भी तरह की पथरी खत्म हो जाती है।

13. मूली : पित्त की पथरी के रोगी को सुबह-शाम मूली के पत्तों का रस 20 से 40 मिलीलीटर सेवन करने से लाभ होता है।

14. गाजर : गाजर का रस पीने से पथरी टूटकर निकल जाती है।

15. नींबू : गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से पथरी में आराम मिलता है।


16. सेब का सिरका : सेब का सिरका यानि ACV यानि apple cider vinegar में अम्लीय गुण पाए जाते हैं जो की लीवर को कोलेस्ट्रॉल बनाने से रोकते हैं| साथ ही यह सिरका पथरी को घोलने में मदद करता है और पथरी के दर्द से भी राहत दिलवाता है|

पथरी को घोलने के लिए और दर्द से छुटकारा पाने का एक आसान नुस्खा ये है के एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच निम्बू का रस और 2 चम्मच सेब का सिरका मिलाकर रोजाना सुबह खली पेट पीयें|

17. सोंठ : 6 ग्राम पिसी हुई सोंठ में 1 ग्राम नमक को मिलाकर गर्म पानी से फंकी लेने से पथरी में लाभ होगा।

* सोंठ, वरूण की छाल, रेड़ के पत्ते और गोखरू का काढ़ा बनाकर सुबह खाने से पथरी जल्दी खत्म हो जाती है।

18. वरूण : वरूण के पेड़ की छाल का काढ़ा पिलाने से पित्ताशय की पथरी ( pitt ki pathri ) खत्म होकर निकल जाती है।

* वरूण की छाल, सोंठ और गोखरू का काढ़ा बनाकर पीने से पथरी खत्म होती है।

19. इन्द्रायण : इन्द्रायण की जड़ और कुलथी का काढ़ा बनाकर पीने से पथरी के रोग में बहुत लाभ होता है।

20. सोडा वाटर : एक कप सोडा वाटर के पानी में 2 चम्मच ग्लिसरीन डालकर रोज दोपहर और शाम को कुछ दिनों तक खाने से पथरी में लाभ होगा।

21. इमली : लगभग आधा से एक ग्राम इमली रस सुबह-शाम यवक्षार से घुले ताजे पानी के साथ लेने से पथरी खत्म हो जाती है। यह अजीर्ण और पेशाब की परेशानी को भी दूर करता है।

22. कदली (केला) : कदली क्षार और तिल क्षार प्रत्येक को 0.24 ग्राम से 1.08 ग्राम शहद में मिलाकर रोज 3 से 4 बार खाने से सब तरह की पथरी खत्म होती है।

23. केला : केले के पेड़ के तने के रस में थोड़ी-सी मिश्री को मिलाकर पीने से कुछ दिनों में ही पथरी खत्म होकर निकल जाती है।

* केले के तने का रस 30 मिलीलीटर, कलमी शोरा 25 मिलीलीटर दूध में मिलाकर पिलाने से पथरी खत्म हो जाती है।

24. कड़वी तुंबी : कड़वी तुंबी का रस और यवक्षार मिलाकर मिश्री डालकर पीने से पथरी खत्म होती है।

25. अंगूर का रस : रोज 200 मिलीलीटर अंगूर का रस पीने या अंगूर खाने से पित्ताशय की पथरी में बहुत ही फायदा होता है।

26. सीताफल : सीताफल के 25 ग्राम रस में सेंधानमक मिलाकर रोज पिलाने से पथरी खत्म होकर निकल जाती है।

27. अरहर : अरहर के पत्ते 6 ग्राम और संगेयहूद 0.48 ग्राम को बारीक पीसकर पानी में मिलाकर पीने से पथरी में बहुत ही फायदा होता है।

28. प्याज : प्याज, लहसुन, सरसों, महुआ और सहजन की छाल को पानी के साथ पीसकर, पित्ताशय के ऊपर लेप करने से सूजन और दर्द दूर होता है और इससे पथरी में लाभ होगा।

पथरी के लिए..

अकरकरा ,संभालू के बीज, गोखरू चूर्ण, तुलसी के पत्ते, पाषाण भेद ,पिपली, मुलेठी, कास (कासला) का जड़, लौंग, सोंठ सब बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख ले।

1 गिलास पानी मे 12 से 15 ग्राम चूर्ण डालकर काढ़ा बना ले ।काढ़ा बनाते समय 1 ,2 इलायची का चूर्ण भी मिलाये।
सुबह दोपहर शाम दे।

गुलहड़ (उड़हुल) के फूल का पाउडर 1 चम्मच सुबह शाम सादे पानी से ले इसके लेने पर पेट मे दर्द होगा वो दर्द पथरी के टूटने के कारण होता है पानी का सेवन अत्यधिक मात्रा में करें

कुल्थी के दाल का पानी पिये व इसकी दाल बनाकर खाये

छुई-मुई की 10 मिलीलीटर जड़ का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।लाजवन्ती (छुई-मुई) के पंचांग का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीयें। इसके काढ़े से पथरी घुलकर निकल जाती है।

Saturday, 31 March 2018

Ghamori Treatment in Hindi

घमौरियां दूर करने के सबसे असरकारक घरेलू नुस्खे उपचार
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घमौरी होने का कारण: 

★ यह रोग अधिक गर्मी के कारण तथा शरीर की ठीक प्रकार से साफ़-सफाई न होने के कारण होता है।

★ यह रोग रोगी को कब्ज बनने के कारण भी हो सकता है।

घमौरी के लक्षण :

★ जब यह रोग किसी व्यक्ति घमौरी को हो जाता है तो उसकी त्वचा पर छोटी-छोटी और लाल-लाल फुन्सियां निकलती हैं, जिसमें से कभी-कभी दूषित द्रव निकलने लगता है तथा इनमें खुजली भी होती रहती है।

                               

★ घमौरियाँ होने पर जलन और बेचैनी बनी रहती है| यदि यह लगातार बनी रहे तो शरीर अस्वथ्य होने लगता है। इसलिए इसे छोटी मोटी परेशानी समझकर अनदेखा नही करना चाहिए और और समय रहते ही इसका इलाज करना चाहिए। इन्हे ठीक करने के लिए घरेलू उपचारों से बेहतर कुछ नहीं है|

घमोरियों में तुरंत आराम देने वाले घरेलु आयुर्वेदिक उपाय :Ghamoriyo ka ilaj in Hindi


                 

                         


१) घी:  गाय या भैंस के असली घी की पूरे शरीर पर मालिश करने से घमौरियां मिट जाती हैं और दुबारा कभी होती भी नहीं हैं।

२) तुलसी:  तुलसी(Basil)की लकड़ी को पीसकर चन्दन की तरह शरीर पर मलने से घमौरियां समाप्त हो जाती हैं।

                 

३) समुदफेन:  समुदफेन के बारीक चूर्ण को गुलाबजल (rose water)में मिलाकर शरीर पर लगाने से घमौरियों से राहत मिलती है।

४) करेला:  चौथाई कप करेले के रस में 1 चम्मच खाने वाला मीठा सोडा मिलाकर दिन में 2 से 3 बार घमौरियों(Heat rash) पर लेप करने से घमौरियां मिट जाती हैं।

५) आम: कच्चे आम(Raw mango) को धीमी आंच में भूनकर इसके गूदे का शरीर पर लेप करने से घमौरियों में आराम होता है।
६) धनिया:  बर्फ के पानी में 50 ग्राम धनिये(coriander) के पानी को भिगो देना चाहिए। लगभग 5 घंटे बाद इस पानी को छानकर घमौरियों वाले स्थान पर लगाने से राहत मिलती है। यदि किसी छोटे तौलिये को इस पानी में भिगोकर घमौरियों पर रखा जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है। इस प्रक्रिया को 2 दिन तक सुबह-शाम करने से घमौरियां नष्ट हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त नींबू के रस में धनिया डालकर पीना भी घमौरियों में लाभकारी रहता है। ध्यान रहे कि घमौरियों के कारण शरीर में नमक की मात्रा कम होने लगती है। इसलिए नमक का सेवन अवश्य ही करना चाहिए। यदि रोटी में नमक और अजवायन को मिला लिया जाए तो भी घमौरियों में बहुत आराम मिलता है।

७) लहसुन: लहसुन की कलियों (Garlic buds) को पीसकर रस उसका रस निकाल लें। यह रस 3 दिन तक शरीर पर मलने से शरीर पर गर्मी से निकलने वाली घमौरियां मिट जाती हैं।

८) बर्फ : घमौरियां होने पर शरीर पर बर्फ मलने से ठंडक मिलती है।

९) मुलतानी मिट्टी:  शरीर पर मुलतानी मिट्टी का लेप करने से घमौरियां कुछ ही दिनों में मिट जाती हैं।

१०) नारियल: रोजाना सुबह और शाम नहाने के बाद नारियल के तेल में कपूर को मिलाकर पूरे शरीर पर मालिश करने से घमौरियां दूर हो जाती हैं।


ak shath bhojan me kya kya khna hai kya nhi

११) मेहंदी:

★ शरीर में घमौरियां होने पर मेहंदी का लेप करने से घमौरियां कुछ ही समय में बिल्कुल खत्म हो जाती हैं।

★ नहाते समय पानी में मेहंदी के पत्तों को पीसकर मिला लें। इस पानी से नहाने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं और रोगी को राहत मिलती है।

१२) नीम:

                  


★  घमौरियां होने पर नीम की छाल को घिसकर चन्दन की तरह शरीर पर लगाने से घमौरियां कुछ ही समय में ठीक हो जाती हैं।


★ पानी में थोड़ी सी नीम की पत्तियां डालकर उबाल लें। इस पानी से नहाने से घमौरियां दूर हो जाती हैं।


★ नीम की पत्तियों में एंटीबायोटिक गुण होता है| इसका प्रयोग करने के लिए एक बर्तन में पानी भरकर उसमें नीम की पत्तियां डालकर उबाले| फिर इस पानी को गुनगुना करके स्नान कर ले| नीम के पानी से प्रतिदिन दिन में 2 बार स्नान करने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं। 

१३) चंदन:

★ सफेद चंदन को पानी के साथ पीसकर शरीर पर लेप करने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं।

★ गुलाबजल में चंदन और कपूर को घिसकर घमौरियों पर लगाने से आराम आता है।

१४) खसखस:  20 ग्राम खसखस को पीसकर पानी में मिलाकर घमौरियों पर लगाने से घमौरियों से राहत मिलती है। इसके अलावा 2 चम्मच खसखस के शर्बत को 1 कप पानी में मिलाकर दिन में 2-3 बार पीने से भी घमौरियों में लाभ होता है।

१५) अनानास: घमौरियां होने पर अनान्नास का गूदा शरीर पर लगाने से रोगी को आराम होता है।

१६)बड़हल :  बड़हल (बरहर) के पेड़ की छाल की फांट से त्वचा को धोने से घमौरियां और फुन्सियां ठीक हो जाती हैं।

१७) सरसों: पानी में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर सुबह और शाम मालिश करने से सिर्फ 3 दिनों में ही घमौरियां पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

१८) नारंगी: नारंगी के छिलकों को सुखाकर उसका पाउडर बना लें। इस पाउडर को गुलाबजल में मिलाकर शरीर पर लेप करने से घमौरियों में लाभ होता है।
                                                                                



घमौरी का प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा सरल उपचार: 


                

1- घमौरियों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को रात के समय में अपने पेड़ू पर गीली मिट्टी की गर्म पट्टी बांधनी चाहिए।


मधुमेह के कुछ आसन से घरेलू उपाय

2- यदि रोगी व्यक्ति को कब्ज की शिकायत हो तो उसे प्रतिदिन सुबह के समय में एनिमा क्रिया करनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो सके। इसके बाद रोगी को दिन में 2 बार अपने शरीर पर मिट्टी की गीली पट्टी का लेप करना चाहिए और जब यह लेप सूख जाए तब स्नान करना चाहिए।

3- इस रोग से पीड़ित रोगी को उत्तेजक पदार्थ वाला भोजन नहीं करना चाहिए। रोगी को हमेशा सादा भोजन ही करना चाहिए।

4- बारिश के पानी में स्नान करन से घमौरी का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

5- रोगी व्यक्ति को एक बर्तन में पानी भरकर उसमें नीम की पत्तियां डालकर उबालना चाहिए। फिर इस पानी को गुनगुना करके स्नान करना चाहिए। इस स्नान को प्रतिदिन दिन में 2 बार करने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं।

6- रोगी व्यक्ति को सुबह के समय में नीम की 4-5 कच्ची पत्तियां चबाने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।

                          

बचाव के तरीके इन्हे भी जानिए:

घमोरियों वाली जगह पर आर्टिफिशियल ज्वेलरी न पहने|

घमौरियां होने पर ज्यादा फिटिंग वाले कपडे ना पहने, ढीले और कॉटन के कपड़ो का चयन करे|

गरम और तेज मिर्च-मसाले युक्त भोजन से दूर रहे और जितना हो सके शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले पेय का सेवन करे|

चन्दन का पेस्ट भी आपको ठंडक देने में मदद करेगा| इसके अतिरिक्त शरीर पर बर्फ रगड़े|

अत्यधिक धूप में न निकलें| बहुत जरुरी होने पर शरीर को स्कार्फ़ या समर कोट की मदद से अच्छे से ढके| कोई भी हिस्सा खुला ना रखे| ‘

घमौरियों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को रात के समय में अपने पेड़ू पर गीली मिट्टी की गर्म पट्टी बांधनी चाहिए। यह घमौरियां ठीक करने का आयुर्वदिक तरीका है|


Dahi khane ke Fayde & nuksan

दही खाने के लाभ :
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👉✅ दही (Dahi) में प्रोटीन की क्वालिटी सबसे अच्छी होती हैं। दही जमाने की प्रक्रिया में बी विटामिनों में विशेषकर थायमिन, रिबोफ्लेवीन और निकोटेमाइड की मात्रा दुगुनी हो जाती है।

 👉✅ दुध की अपेक्षा दही आसानी से पच जाता है।

दही के पांच प्रकार :

1. मन्द

2. स्वादु

3. स्वाद्वम्ल

4. अम्ल

5. अत्यम्ल


sugar rog ilaj ke kuch aasan gharelu upay

1. मन्द दही : जो दही Dahi/Curd/Yogurt)दूध की तरह अस्पष्ट रस वाला अर्थात आधा जमा हो और आधा न जमा हो, वह मन्द (कच्चा दही) कहलाता है। मन्द (कच्चे दही) का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके सेवन से विष्ठा तथा मूत्र की प्रवृत्ति, वात, पित्त, कफ तथा जलन आदि रोग पैदा होते हैं।

2. स्वादु दही : जो दही अच्छी तरह से जमा हुआ हो, मधुर खट्टापन लिए हुए हो उसे स्वादु दही कहा जाता है। स्वादु दही नाड़ियों को अत्यन्त रोकने वाला और रक्तपित्त को साफ करने वाला होता है।

3. स्वाद्वम्ल दही : जो दही अच्छी तरह जमा हुआ मीठा और कषैला होता है। वह `स्वाद्वम्ल` कहलाता है। `स्वाद्वम्ल` दही के गुण साधारण दही के गुणों के जैसे ही होते हैं।

4. अम्ल दही : जिस दही(Dahi/Curd) में मिठास नहीं होती है और खट्टापन ज्यादा होता है। वह दही अम्ल यानि खट्टा दही कहलाता है। अम्ल दही (खट्टा दही) पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला रक्तपित्त को बिगाड़ने वाला और रक्तपित्त तथा कफ (बलगम) को बढ़ाने वाला होता है।

5. अत्यम्ल दही : जिस दही को खाने से दांत खट्टे हो जाएं, रोंगटे खडे़ हो जाए और कंठ आदि में जलन हो, वह दही अत्यम्ल कहलाता है। यह दही पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला एवं गैस तथा पित्त (गर्मी) को पैदा करता है।

Health Jivan ke Upay

स्वभाव : दही खाने से शरीर को ठण्डक और शीतलता महसूस होती है।

हानिकारक ,dahi khane se nuksan :

👉🔴 रात्रि में दही के सेवन से बचना चाहिये |

👉🔴 भादों और सावन में दही और मठा नहीं खाना चाहिए।

👉🔴 खट्टा दही(Dahi/Curd) पित और बलगम को पैदा करता है। ज्यादा खट्टा दही खाने से दांत खट्टे होते हैं और शरीर के रोये खड़े हो जाते हैं, पेट में जलन भी होती है।

परहेज : दमा, श्वांस, खांसी, कफ, सूजन, रक्तपित्त तथा बुखार आदि रोगों में दहीं नहीं खाना चाहिए। रात को दही नहीं खाना चाहिए। दही में चीनी या शहद डालकर खाने से इसके गुण बढ़ जाते हैं।

दोषों को खत्म करने के लिए : दही में नमक, जीरा और कालीमिर्च मिलाकर खाना ज्यादा लाभदायक है।

गुण : गर्म दिमाग वालों के लिए दही बहुत गुणकारी है। दही प्यास को रोकता है, दही की मलाई को सिर पर मसाज करने से वही फायदा मिलता जो घिया, लौकी के बीज से मिलता है। दही को अगर चेहरे पर लगाया जाये तो चेहरे की झांई, रूखापन और कालापन दूर होता है।

रोज गर्म पानी पीने फयदा छोटी छोटी जीजे क्या क्या फयदे करते है

दही का विभिन्न रोगों को दूर करने में उपयोग :
Dahi ke Gharelu Ayurvedic Nuskhe

                       

1. चेहरे की झांई के लिए:–

• जब त्वचा रूखी और काली हो जाये, जगह-जगह चेहरे पर दाग, धब्बे पड़ जायें और मुंहासों से चेहरा भयानक हो जाये तो चेहरे और पूरे शरीर पर उबटन की तरह दही से मालिश करें। फिर 5 मिनट के बाद नहा लें।

• दही में बेसन को मिलाकर चेहरे पर लगा लें और सूखने के बाद ठण्डे पानी से धो लें। ऐसा करने से चेहरे का रंग साफ हो जाता है। सूरज की किरणों से चेहरे पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव भी दही लगाने से दूर हो जाते हैं। चेहरे को साफ करने के लिए दही या नारंगी का रस मिलाकर प्रयोग करे तो यह भी एक अच्छा क्लिंजर (क्लिंजिग मिल्क) की तरह की काम करता है। दही के प्रयोग से त्वचा में रंगत आ जाती है। मुंहासों के लिए दही में चावल का आटा मिलाकर लगाया जाये तो मुंहासे ठीक हो जाते हैं।

2. खुजली dahi benefits for itching :- शरीर में जहां पर खुजली हो वहां पर दही को लगाने से खुजली दूर हो जाती है।

3. उच्चरक्तचाप Hypertension:- दही (Dahi/Curd)में ग्लूकोज मिलाकर खाते रहने से कुछ दिनों में उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) ठीक हो जाता है। औषधि सेवन-काल तक और कुछ न खायें। यदि दही खाने से शरीर में अकड़न और आलस्य महसूस हो तो ग्लूकोजयुक्त चाय पी सकते हैं।

4. हाथ-पैरों की जलन:- दही के तोड़ (खट्टे पानी) से मालिश करने से हाथ-पैरों की जलन समाप्त हो जाती है।Dahi khane ke Fayde

Ghamori Treatment in Hindi

5. गुल्यवायु हिस्टीरिया:- दही और मट्ठा का सेवन हिस्टीरिया के रोगियों को लाभकारी होता है।

6. नहरूआ (स्यानु):- दही में कलौंजी को बारीक पीसकर नहरूआ के घाव पर लगाने से रोग नष्ट हो जाता है।

7. दाद के रोग Ringworm:- दही में बेर के पत्ते पीसकर दाद पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

8. होठों की लाली के लिए:- दही के मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर लगाने से होठ लाल हो जाते हैं।

9. आग से जलने पर On burn: बरगद की कोंपल (मुलायम पत्तियां) को पीसकर दही(Dahi/Curd) में मिलाकर जले हुए भाग पर लगाने से लाभ होता है।

10. नाभि का हटना (टलना):- 500 ग्राम दही में 1 चम्मच पिसी हुई हल्दी मिलाकर रोजाना खायें। इस मिश्रण को नाभि के स्थान पर लाकर खाने से नाभि अपना स्थान नहीं छोड़ती है।

Ghamori Treatment in Hindi

11. फरास:- 1 कप दही में नमक मिलाकर मिला लें। इस दही को बालों में लगाने से सिर की फरास दूर हो जाती है।

12. फोड़े, सूजन, दर्द जलन:- अगर शरीर में फोड़े, सूजन, दर्द जलन हो तो पानी निकाला हुआ दही बांधे, एक कपड़े में दही डालकर पोटली बांधकर लटका देते हैं। इससे दही का पानी निकल जाएगा। फिर इसे फोड़े पर लगाकर पट्टी बांध देते हैं। 1 दिन में 3 बार पट्टी को बदलने से लाभ होता है।

13. अनिद्रा Insomnia:- दही में पिसी हुई कालीमिर्च, सौंफ, तथा चीनी मिलाकर खाने से नींद आ जाती है।

14. भांग का नशा:- ताजा दही खिलाते रहने से भांग का नशा उतर जाता है।

15. काली खांसी:- 2 चम्मच दही, 1 चम्मच चीनी तथा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग कालीमिर्च को मिलाकर बच्चे को चटाने से बच्चों की काली खांसी मिट जाती है।

16. बालों का झड़ना Hair fall:- खट्टे दही (Dahi/Curd)को बालों की जड़ों में लगाकर थोड़ी देर मालिश करने के बाद उसे ठण्डे पानी से धो लें। इससे बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।

17. बालों को काला करना dahi benefits for hair in hindi:

• आधा कप दही में 10 पिसी हुई कालीमिर्च और 1 नींबू निचोड़ मिला लें और इसे बालों पर लगाकर 20 मिनट तक रहने दें। इसके बाद सिर को धो लें। इससे बाल काले और मुलायम हो जाते हैं।

• 100 मिलीलीटर दही में 1 ग्राम बारीक पिसी हुई कालीमिर्च को मिलाकर सप्ताह में एक बार सिर को धोयें और बाद में गुनगुने पानी से सिर को धो डालें। इससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है और बालों में कालापन और सुन्दरता देखने को मिलती है।

18. गंजेपन का रोग:- दही को तांबे के बर्तन से ही इतनी देर रगडे़ कि वह हरा हो जाए। इसको सिर में लगाने से सिर की गंजेपन की जगह बाल उगना शुरू हो जाते हैं।

19. अपच: – दही में भुना हुआ पिसा जीरा, नमक और कालीमिर्च डालकर रोजाना खाने से अपच (भोजन न पचना) ठीक हो जाता है और भोजन जल्दी पच जाता है।

20. आधा सर का दर्द Migraine pain:– यदि सिर दर्द सूर्य के साथ बढ़ता और घटता है तो इस तरह के सिर दर्द को आधासीसी (आधे सिर का दर्द) कहते हैं। आधासीसी (आधे सिर का दर्द) का दर्द दही के साथ चावल खाने से ठीक हो जाता है। सुबह सूरज उगने के समय सिर दर्द शुरू होने से पहले रोजाना चावल में दही मिलाकर खाना चाहिए।

Berojgari ki Sabse Badi Vajah


21. बवासीर:- जब तक बवासीर में खून आता रहे तब तक केवल दही ही खाते रहें बाकी सारी चीजे बंद कर दें। इससे बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।

22. बच्चों का भोजन:- दही, मां के दूध के बाद बच्चे का सबसे अच्छा भोजन होता है। बुल्गोरिया में जिन बच्चों को मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता है। उन बच्चों को खाने के लिए दही ही दिया जाता है।

23. हृदय रोग:-

• उच्च रक्तदाब, मोटापा तथा गुर्दे की बीमारियों में भी दही खाने से बहुत लाभ होता है।

• दही हृदय रोग (दिल का रोग) की रोकथाम के लिए बहुत अच्छा है। दही खून में बनने वाले कोलेस्ट्राल नामक घातक पदार्थ को मिटाने की ताकत रखता है। कोलेस्ट्राल नामक सख्त पदार्थ रक्त शिराओं में जमकर रक्त प्रवाह (खून को चलने) से रोकता है और उससे ओटोर ओस क्लीरोसिस नामक हृदय रोग (दिल का रोग) होता है। चिकने पदार्थ खाने वाले इसी के शिकार हो जाते हैं। अत: दही का प्रयोग बहुत ही उत्तम होता है।

24. बाल गिरने के कारण : जरूरत से ज्यादा दिमाग पर जोर पड़ने से बाल ज्यादा गिरते हैं। औरतों में एक्ट्रोजन हार्मोन की कमी से बाल अधिक गिरते हैं। भोजन में लौह तत्व, विटामिन `बी` तथा आयोडीन की कमी से उम्र से पहले ही बाल गिरने लगते हैं। बालों को गिरने से रोकने के लिए दही से सिर को धोना चाहिए। दही में वे सभी तत्व होते हैं जिसकी स्वस्थ बालों को अधिक आवश्यकता रहती है। दही को बालों की जड़ों में लगायें और 20 मिनट बाद सिर को धोने से लाभ मिलता है।

25. फरास:- 1 कप दही में नमक मिलाकर मिला लें। इस दही को बालों में लगाने से सिर की फरास दूर हो जाती है।

26. अफारा (पेट में गैस का बनना):- दही की छाछ (दही का खट्टा पानी) को पीने से अफारा (पेट की गैस) में लाभ होता है।

27. रतौंधी: दही के पानी में कालीमिर्च को पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी के रोग में आराम आता है।Health benefits of Dahi(Curd)

28. जीभ की प्रदाह और सूजन:-

• दही में पानी मिलाकर रोजाना गरारे करने से जीभ की जलन खत्म हो जाती है।

• दही के साथ पका हुआ केला सूर्योदय (सूरज उगने से पहले) से पहले खाने से जीभ में होने वाली फुन्सियां खत्म हो जाती है।

29. कब्ज:- दही का तोड़ (खट्टा पानी) पीने से कब्ज हट जाती है।

30. सिर की रूसी:- गाय के दही के पानी से बालों की जड़ो में रोजाना मालिश करने से सिर की रूसी कम हो जाती है।

31. कैंसर कर्कट रोग:- दही के लगातार सेवन करने से कैंसर होने की संभावना नहीं रहती।

32. मुंह के छाले:- मुंह में छाले होने पर रोज सुबह मुंह के छालों पर दही मलने से लाभ होता है।

33. दस्त:-

• 100 मिलीलीटर दही में आधे केले को मिलाकर खाने से दस्त में लाभ मिलता है।

• गाय या बकरी के दूध से जमी हुई दही में पकी हुआ बेल का गूदा मिलाकर खाने से पुराने दस्त में लाभ मिलता है।

• दही में तालमखाने डालकर खाने से दस्त में लाभ मिलता है।

• मां के दूध के न पचने के कारण आने वाले दस्त में दही का तोड़ यानी खट्टा पानी पिलाने से लाभ मिलता है।

34. शरीर की दुर्गन्ध:- शरीर से दुर्गन्ध आने पर दही (Dahi/Curd)और बेसन मिलाकर शरीर पर मलने से शरीर की दुर्गन्ध नष्ट हो जाती है।

35. खूनी अतिसार:- दही के साथ हंसपदी लेने से खूनी दस्त (रक्तातिसार) में आराम होता है।

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36. आंव रक्त (पेचिश):- अगर पेचिश पुराना हो गया हो तो उसके लिए बेलपत्थर के गूदों को दही में डालकर खाने से रोगी को लाभ मिलता है।

37. अग्निमान्द्य (हाजमे की खराबी):- दही और जीरा को नमक और पिसी हुई कालीमिर्च के साथ मिलाकर खाने से अपच (भोजन का न पचना) और अग्निमान्द्य (भूख का कम लगना) ठीक हो जाता है।

38. प्रदर रोग: दही के साथ हंसपदी खाने से प्रदर रोग ठीक हो जाता है।‘

39. प्यास अधिक लगना:- दही में गुड़ मिलाकर खाने से बादी की प्यास मिट जाती है तथा भोजन के बाद लगने वाली तेज प्यास कम होती है।

40. मोटापा को कम करने के लिए:- दही को खाने से मोटापा कम होता है।

41. जुकाम:- खट्टे दही के अन्दर गुड़ और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर खाने से नया और पुराना हर तरह का जुकाम ठीक हो जाता है।

42. नींद न आना (अनिद्रा):- दही में सौंफ, चीनी और पिसी हुई कालीमिर्च मिलाकर खाने से नींद अच्छी आती है।

43. पेट के कीड़े:- दही में असली शहद मिलाकर 3-4 दिन तक दिन में सुबह और शाम पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

44. नकसीर (नाक से खून आना):-

• दही की लस्सी बनाकर पीने से नकसीर (नाक से खून बहना) का रोग नहीं होता है।

• दही और मिश्री को एक साथ मिलाकर उसके अन्दर लाल फिटकरी के चूर्ण को डालकर खाने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।

• लगभग 125 ग्राम दही को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर इसमें 1 ग्राम फिटकरी मिलाकर खाने से नकसीर (नाक से खून बहना) आना रूक जाता है।

• दही में 4 कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर खाने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है



Bacho ki Khansi ke Gharelu Nuskhe

बच्चों की सर्दी तथा खांसी को दूर करने के  सबसे असरकारक घरेलु उपाय
Bacho ki Khansi ke Gharelu Nuskhe

छोटे बच्चों को अक्सर सर्दी-खांसी का रोग होता रहता है। इस रोग के कारण बच्चा हर वक्त खांसता रहता है तथा उसकी नाक से पानी निकलता रहता है। बच्चों को यह रोग उसकी मां को ठंड लग जाने के कारण, मां के दूध में कोई दोष उत्पन्न होने के कारण, मां को खांसी तथा सर्दी होने के कारण तथा बच्चे को ठंड लग जाने के कारण तथा अन्य कारणों से भी हो जाता है।

इन दिनों कफ से कुपित रहने से खांसी, शर्दी जुकाम,गले में खराश व दर्द होना टांसिल्स में दर्द  ( टांसिलाइटिस) होना, हल्का सा ज्वर, हाथ पैरो में दर्द या टूटन होना आदि व्याधियां होती है। मौसम का सन्तुलन ठीक नहीं रहता, याने कभी गर्मी तो कभी शर्दी पड़ती है इस की वजह से शरीर पर कुप्रभाव पड़ता है और मौसमी बीमारियां होती हैं। इन व्याधियों को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपाय प्रस्तुत है।

Ghamori Treatment in Hindi

बच्चों की सर्दी-खांसी के आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे : 
Bachon ki Khansi ka Desi Ilaj in Hindi

                       

1.बच्चे को गर्म पानी में गुड़, जीरा और काली मिर्च का मिश्रण दे। सर्दी, खांसी और गले में खराश होने पर यह मिश्रण असरदार होता है।

2. बच्चे को 1-2 ग्राम भुनी हुई हल्दी का चूर्ण शहद के साथ दिन में 3-4 बार चटाने से बच्चे की सर्दी तथा खांसी का रोग ठीक हो जाता है।

               


3.आधी कटोरी देसी घी में एक गांठ अदरक पीस कर उसमें २५ ग्राम गुड़ डालकर पकालें। ठंडा होने पर थोड़ा थोड़ा बच्चे को खिलाये। यह खाँसी की अचूक दवा है।

4. काली मिर्च, सोंठ और पीपल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसके बाद इस चूर्ण को 2 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ सदी-खांसी से पीड़ित बच्चे को दिन में 3 बार चटाने से लाभ होता है।
5. लहसुन की कली को पानी में उबाल लें। फिर इस लहसुन को मसलकर 5 से 10 ग्राम मिश्री के साथ दिन में 2-3 बार बच्चे को सेवन कराने से उसका सर्दी-खांसी का रोग ठीक हो जाता है।

6.तुलसी की ११ पत्ती, काली मिर्च २ ,एक चुटकी पिसा सेन्धा नमक और एक चुटकी पिसी सोंठ और चारों चीज़ों को २ कप पानी में डालकर उबालें। जब पानी उबलते- उबलते आधा कप शेष बचे तब उतार कर छान ले इस काढ़े को आधा सुबह और आधा रात को सोते समय पी ले ।

7. बच्चे को इन रोगों से बचाने के लिए बच्चे की मां को भी अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखना चाहिए। यदि किसी बच्चे की मां को सर्दी तथा खांसी हो जाती है तो उसका भी तुरंत इलाज कराना चाहिए।

8. एक कप सरसो के तेल में अजवाइन और लहसुन की दस कलियां लेकर उसे पकाए, थोड़ा ठंडा होने पर उससे बच्चे की मालिश करे। सरसों के तेल, लहसुन और अजवाइन में कीटाणु-रोधक और विषाणु-रोधक गुण होते हैं। यह आपके बच्चे को काफी मात्रा में आराम प्रदान करने में सहायता करता है।
9. सहजन की कोमल हरी पत्तियों को तोड़ें। एक मोटी पेनी वाली कढ़ाई में १/२ कप नारियल तेल गर्म करें और उसमें मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां डालें। पत्ते सूख जाने के बाद, आप कढ़ाई को आंच से हटा सकती हैं। सर्दी, खांसी और कफ जमा होने पर इस तेल को अपने बच्चे के बालों के तेल के रूप में प्रयोग करें।

10. सरसों का तेल गर्म करें। इसमें एक छोटा चम्मच सेंधा नमक डालें। इसे बच्चे की पीठ और छाती पर लगायें।



11. Adrak Tulsi se Bachon ki Khansi ka ilaj :अदरक और तुलसी दोनों को पीस लें। शहद डालें और इसे अपने बच्चे को दें।

12. एक चम्मच घी लें और इसमें चुटकीभर ताज़ा कूटा हुआ काली मिर्च का पाउडर डालें। यह स्वादिष्ट होता है, और सर्दी-खांसी में निश्चित रूप से आराम पहुंचाता है।

खाने का नमक ५० ग्राम, खाने का सोडा ५० ग्राम और पिसी हुई फिटकरी  ५ ग्राम  - तीनों को खूब अच्छी तरह मिला ले पीसकर और एक शीशी में भरकर रख ले । एक गिलास पानी गुनगुना गरम कर ले और इसमें एक चम्मच यह मिश्रण घोल कर गरारे करे ।यह गरारे सुबह उठते समय, दोनों वक़्त के भोजन के बाद और रात को सोने से पहले अवश्य करने चाहिए।

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Sir dard ke gharelu nuskhe bataye

सिर दर्द के घरेलू नुस्खे
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आजकल सब लोग एक दूसरे से बेहतर करने और आगे निकालने की दौड़ में लगे है, ऐसे में सिर दर्द की शिकायत होना आम है। सिर दर्द 


आज की इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में सिर दर्द एक सामान्य बात है। हर उम्र के लोग अकसर इसकी शिकायत करते हैं।हर किसीको कभी ना कभी सरदर्द का अनुभव अवश्य ही होता है। लेकिन सरदर्द के कारण अलग अलग हो सकते है| सरदर्द का मुख्य कारण सर की धमनियॉं और मांस पेशी में तनाव पैदा होना है।लेकिन कभी कभी सरदर्द मस्तिष्क की बिमारी के कारण या कभी तनाव और अन्य कारणों से भी हो सकता है ।

*रात में कम-से-कम 6-8 घंटे की नींद जरूर लें और सोने - जागने का शेड्यूल एक जैसा रखने की ही कोशिश करे।


√.    Gahari nind aane ke upay


1 कई बार पेट में गैस बनने से भी सिर दर्द होता है। इसके लिए एक ग्लास में गर्म पानी और नींबू का रस मिला कर पीएं। इससे आपको सिर दर्द से जल्दी राहत मिलती है ।

2 लौंग को हल्की गर्म करके उसे पीसकर सिर पर लेप करने से सर दर्द मिट जाता है ।


√.  Health Jivan ke Upay

3 काम के बोझ से बचने के लिए लोग काफी ज्यादा चाय , कॉफी आदि पीते रहते हैं, जिनमें कैफीन होता है। ज्यादा कैफीन लेने से सिरदर्द की सम्भावना बढ़ती है।

4 बादाम के तेल में केसर मिलाकर दिन में तीन चार बार सूंघने से सर दर्द में आराम मिलता है।

5 सिर दर्द से आराम पाने के लिए गाय का गर्म दूध पीएं। साथ ही अपने आहार में देशी घी को भी शामिल करें।


  • Rang Gora Karne ke Aasan Tarike