आंत सड़ती मैगी, गुटका, शराब, का माँस, पिज्जा, बर्गर,बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।
- दूध (चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।
शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों सेबाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधकशक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर होजाती हैं।
खड़े होकर जल पीने से घुटनों (जोड़ों) में पीड़ा होती है
रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) भोजन पकाने के बाद उसमें नमकडालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
- · Swasth Jeevan Rahne ke Upay
मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं औरक्षय (टीबी) होने का डर रहता है।
नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है, मलेरिया नहीं होता है।
अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिएसर्वश्रेश्ठ है।
हृदय,रोगी के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमीसेंधा नमक, गुड़ चोकर युक्त आटा, छिलके- युक्त अनाज औशधियां हैं।
भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है।अपच नहीं होता है।
मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुरहोती है।
नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग)तथा हैजा से बचाता है।
फल मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।
भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए।उसकेपश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बादपशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।
मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोशकता 100%, कांसे केबर्तन में 97%पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तनऔर प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।
14 वर्श से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, बे्रड,समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।
खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेश्ठ होता है उसके बाद कालानमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।
सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए।देशी घी ही खाना चाहिए है।
रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।
पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखोंकी खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।
खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।
मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी (कच्ची) चीनी का प्रयोगकरना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।
टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करनाचाहिए दाँत मजबूत रहेंगे। (आँखों के रोग में दातून नहीं करना)
यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़े और लिखनेका काम तो न ही करें तो अच्छा है।
निरोग रहने के लिए अच्छी नींद और अच्छा (ताजा) भोजनअत्यन्त आवश्यक है।
देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमजोरहो जाती है भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता है आँखों के रोग भी होते हैं।
- अम्लपित्त, एसिडिटी, उल्टी,- दस्त, पेट के कीड़े , सबका एक उपाय
१५ ग्राम जीरे को ४०० मिली पानी में उबाल लें | जब १०० ग्राम शेष रह जाये तब २०-४० मिली की मात्रा में प्रातः-सांय पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |
एक चम्मच भुने हुए जीरे के बारीक़ चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन भोजन के बाद सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है |
इसमें एंटीसेप्टिक तत्व भी पाया जाता है, जो कि सीने में जमे हुए कफ को निकाल कर बाहर करता है और सर्दी-जुखाम से राहत दिलाता है। यह गरम ताचिर का होता है इसलिये यह कफ को बिल्कुल अच्छी तरह से सुखा देता है।
























