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Sunday, 1 April 2018

swasth jeevan chhoti chhoti par moti salah

 swasth jeevan chhoti chhoti par moti salah
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पेट में कब्ज अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं मरीज की

 70 प्रतिशत रोग केवल पेट परेशान होते हैं

मांसाहार कुछ रोग केवल मांसाहार से होते है |

 जल पीना भोजन के बाद तुरंत जल पीने से होते हैं।

जल पीना भोजन क 1 घंटे बाद ही जल पीनाचाहिये

चाय रोग चाय पीने से होते हैं।

हृदय रोग  शराब, कोल्डड्रिंक और चाय  के सेवनहोता है।

              

आंतसिकुड़ ठंडे जल (फ्रिज) और आइसक्रीम से बड़ीआंत सिकुड़ जाती है।


आंत सड़ती मैगी, गुटका, शराब, का माँस, पिज्जा, बर्गर,बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।


                     


                     

आँखों को हानि बाल रंगने वाले द्रव्यों (हेयरकलर) सेआँखों को हानि  (अंधापन भी) होती है।



  • दूध (चाय)  के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से  चर्म रोग हो जाता है।


शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों सेबाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।

गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधकशक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।

गर्म जल सिर  पर डालने से आँखें कमजोर होजाती हैं।

खड़े होकर जल पीने से घुटनों (जोड़ों) में पीड़ा होती है




                  

खड़े होकर मूत्र त्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होतीहै


रक्तचाप (ब्लडप्रेशर)  भोजन पकाने के बाद उसमें नमकडालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
  • ·         Swasth Jeevan Rahne ke Upay

लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।

मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।

पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं औरक्षय (टीबी) होने का डर रहता है।

नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है, मलेरिया नहीं होता है।
                

तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।

                

मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त  रहता  है।

अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिएसर्वश्रेश्ठ है।

हृदय,रोगी के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमीसेंधा नमक, गुड़ चोकर युक्त आटा, छिलके- युक्त अनाज औशधियां हैं।

भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है।अपच नहीं होता है।
                      

अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीरस्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।

मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुरहोती है।


जल सदैव ताजा का पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।

नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग)तथा हैजा से बचाता है।

                                     

चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ये इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही  पिसवाना चाहिए।

फल मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।

भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए।उसकेपश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बादपशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।

मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोशकता 100%, कांसे केबर्तन में 97%पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तनऔर प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।

                  

गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा,मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करनाचाहिए।

14 वर्श से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, बे्रड,समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।

खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेश्ठ होता है उसके बाद कालानमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।

जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में सेकुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहींपड़ते।

सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए।देशी घी ही खाना चाहिए है।

रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।

पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखोंकी खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।

खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।

मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी (कच्ची) चीनी का प्रयोगकरना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।

टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करनाचाहिए दाँत मजबूत रहेंगे। (आँखों के रोग में दातून नहीं करना)

यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़े और लिखनेका काम तो न ही करें तो अच्छा है।

निरोग रहने के लिए अच्छी नींद और अच्छा (ताजा) भोजनअत्यन्त आवश्यक है।

देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमजोरहो जाती है भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता है आँखों के रोग भी होते हैं।


  • अम्लपित्त, एसिडिटी, उल्टी,- दस्त, पेट के कीड़े , सबका एक उपाय

                


जीरा,धनिया, और  देशी डोरा वाली मिश्री, तीनों को बराबर मात्रा में मीलाकर पीस लें | इस चूर्ण की २-२ चम्मच सुबह-शाम सादे पानी से लेने पर अम्लपित्त या एसिडिटी ठीक हो जाती है | 
    

              

          
जीरा, सेंधा नमक,काली मिर्च,सौंठ और पीपल सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद ताजे (गुनगुना) पानी से लेने पर अपच में लाभ होता है |

                    

पांच ग्राम जीरे को भूनकर तथा पीसकर दही की लस्सी में मिलाकर सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है |

१५ ग्राम जीरे को ४०० मिली पानी में उबाल लें | जब १०० ग्राम शेष रह जाये तब २०-४० मिली की मात्रा में प्रातः-सांय पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |



एक चम्मच भुने हुए जीरे के बारीक़ चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन भोजन के बाद सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है |

इसमें एंटीसेप्‍टिक तत्‍व भी पाया जाता है, जो कि सीने में जमे हुए कफ को निकाल कर बाहर करता है और सर्दी-जुखाम से राहत दिलाता है। यह गरम ताचिर का  होता है इसलिये यह कफ को बिल्‍कुल अच्‍छी तरह से सुखा देता है।


यदि आप नींद न आने की बीमारी से ग्रस्त हैं तो एक छोटा चम्मच भुना जीरा पके हुए केले के साथ मैश करके रोजाना रात के खाने के बाद खाएं.

जब भी सर्दी-जुखाम हो, तो एक ग्‍लास पानी में जीरा ले कर उबाल लें और इस पानी को पिएं। कई साउथ इंडियन घरों में सादा उबला पानी न पी कर 'जीरा पानी' पिया जाता है।

                  

जीरे को बारीक़ पीस लें | इस चूर्ण का ३-३ ग्राम गर्म पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करने से पेट के दर्द तथा बदन दर्द से छुटकारा मिलता है |

जीरा आयरन का सबसे अच्‍छा स्‍त्रोत है, जिसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर होती है। साथ ही गर्भवती महिलाएं, जिन्‍हें इस समय खून और आयरन की जरुरत होती है, उनके लिये जीरा अमृत का काम करता है।

जीरा खाने से लीवर मजबूत होता है और उसकी शरीर से गंदगी निकालने की क्षमता में भी सुधार आता है।
ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए आघा छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ पीएं। डायबिटीज रोगियों को यह काफी फायदा पहुंचाता है।

" कब्जियत की शिकायत होने पर जीरा, काली मिर्च, सोंठ और करी पावडर को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण तैयार कर लें। इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक डालकर घी में मिलाएं और चावल के साथ खाएं। पेट साफ रहेगा और कब्जियत में राहत मिलेगी।