Saturday, 31 March 2018

Hamre ghar ke aas paas kitne ayurvedic aushadhi

                                                                              
आपके आसपास है अमृत
                                                                                

हमारे घर के पास, सड़क के किनारे, बगीचे में या फिर किसी बेकार पड़ी जमीन पर कई पौधे उगे होते हैं। हम उन्हें खुद ही नष्ट कर देते हैं या किसी और के द्वारा नष्ट होते हुए देखते हैं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से वे पेड़ पौधे हमारे कई जटिल रोगों या समस्याओं को ठीक कर सकते हैं। अगर हमें थोड़ा सा ज्ञान हो जाये इनकी उपयोगिता और इनकी अहमियत का तो हम इन्हें सहेज कर इनकी मदद से कई समस्याओं और रोगों को खत्म कर सकते हैं।

1. पीपल के औषधीय उपयोग

पीपल का वृक्ष एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है हमारे देशवासियों के लिये। यह हिन्दू धर्म में सभी वृक्षों में सर्वोपरि है। आयुर्वेद में भी इसका बहुत महत्व है। इसके प्रमुख उपयोग हैं-




● इसके पत्तों का काढ़ा या चाय बनाकर प्रतिदिन पीने से हृदय रोगों में बहुत लाभ होता है। दिल की कमज़ोरी दूर होती है, कैल्शियम प्लैक हटते हैं इसलिये वाल्व भी ठीक होते हैं। इससे शरीर की सूजन, पैरों की सूजन, वेरिकोस वैन में भी बहुत लाभ होता है।

वातरक्त (गाउट) : प्रोटीन्स के अत्यधिक सेवन से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे वातरक्त हो जाता है । इसमें शरीर के सभी जोड़ों में दर्द व सूजन हो जाती है । २० ग्राम पीपल की जड़ की छाल ३२० मि.ली. पानी में डालकर उबालें । चौथाई पानी शेष रह जाने पर उस काढ़े को गुनगुना होने दें । १ चम्मच शहद के साथ उसे पीने से गम्भीर वातरक्त भी ठीक हो जाता है ।

खूनी बवासीर : पीपल के फलों को सुखाकर चूर्ण बना लें । एक चम्मच चूर्ण का १० मि.ली. आँवला रस व १० मि.ली. शहद के साथ दिन में २ बार सेवन करें ।

रक्तपित्त : पीपल के फल का चूर्ण व मिश्री समभाग मिला के रख लें । १-१ चम्मच चूर्ण दिन में ३ बार पानी के साथ लें ।

घाव : पीपल के हाल ही में गिरे हुए सूखे पत्तों का चूर्ण लगाने से घाव जल्दी भर जाता है ।

सिरदर्द व जुकाम : पीपल के चार कोमल पत्ते चबा-चबाकर उनका रस चूसें तथा बाद में पत्तों को थूक दें । दिन में २-३ बार ऐसा करने से कफ-पित्तजन्य सिरदर्द ठीक हो जाता है । यह जुकाम में भी उपयोगी है ।

धातु-दौर्बल्य व मासिक धर्म के विकार : छाया में सुखाये गये पीपल के फलों का चौथाई चम्मच चूर्ण 1 गिलास गुनगुने दूध में मिलाकर रोज पीने से धातु-दौर्बल्य दूर होता है । स्त्रियों का पुराना प्रदर-रोग और मासिक की अनियमितता दूर हो जाती है । इससे कब्ज में भी लाभ होता है ।

कब्जनाशक प्रयोग : पीपल के सूखे फल, छोटी हरड़ व सौंफ समभाग मिलाकर पीस के रखें । 3 से 6 ग्राम चूर्ण रात को गुनगुने पानी से लेने से कब्ज दूर होता है ।

पेट के रोग : 5-5 ग्राम पीपल के पके हुए सूखे फल, छोटी हरड़, सौंफ और 15 ग्राम मिश्री - सबको पीसकर चूर्ण बना लें । रात को सोते समय 3 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी से लें । इससे जठराग्नि प्रदीप्त होती है, मल साफ आता है व पेट के कई रोग शांत होते हैं ।

फोड़ा, बालतोड़ : पीपल के दूध का फाहा फोड़े या बालतोड़ पर लगाने से वह कुछ ही दिनों में सूख जाता है ।

हृदयरोग : ३ ग्राम पीपल के फल का चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से कुछ ही दिनों में हृदयरोग में लाभ होता है ।

हृदय व दमा रोगियों के लिए विशेष प्रयोग

पीपल के पत्तों में हृदय को बल और आरोग्य देने की अद्भुत क्षमता है । पीपल के 15 हरे कोमल पत्ते, जो पूरी तरह विकसित हों, उनका ऊपरी व नीचे का कुछ भाग काट दें । पत्तों को धोकर एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें । पानी आधा शेष रहने पर छान के पियें । इस पेय को हृदयाघात के बाद 15 दिन तक सुबह-शाम लगातार लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है ।

पीपल के सूखे पत्तों को जलाकर उनकी ५ ग्राम राख को सुबह शहद के साथ 40 दिन तक लेने से दमे में लाभ होता है । ऊपर बतायी गयी विधि से बनाया गया पेय दमा के रोगियों के लिए भी खूब लाभदायी है ।
               
● इसकी छाल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से गठिया में बहुत लाभ होता है क्योंकि यह किडनी की क्रियाविधि को सुधारकर यूरिक एसिड आदि घातक तत्वों को शरीर से बाहर निकाल देता है। किडनी के रोगों में भी लाभदायक है। चर्म रोगों में भी यह काढ़ा बहुत फायदेमंद है।

2. अपामार्ग

मेरी यह सबसे पसंदीदा दवाई है। मुझे इससे प्रेम है क्योंकि यह मानवता के लिए ईश्वर का अद्भुत वरदान है। इसके कई कई चिकित्सा उपयोग हैं-

                    


Dahi khane ke Fayde & nuksan

● थायरॉइड की समस्या में इसकी पत्तियों का चूर्ण बहुत लाभ पहुंचाता है।

● सैल्युलाईटिस (शोथ) में इसकी पत्तियों का लेप अद्भुत है।

● अस्थमा में इसकी जड़ का चूर्ण सुबह खाली पेट लेने से शानदार परिणाम मिलते हैं।

● जड़ का चूर्ण या काढ़ा पथरी के लिए सटीक दवाई है।

● इसके बीज खूनी बवासीर और माहवारी में अधिक रक्त आने की परम औषधि है।

● इसके बीज की दूध में बनाई खीर खाने से बहुत ज़्यादा भूख लगने की समस्या दूर हो जाती है।

● मोटापे में इसकी पत्तियों का चूर्ण बहुत लाभदायक है विशेष रूप से महिलाओं में।

3. धतूरा

धतूरा वह अमृत है जिसे हम ज़हर समझकर नज़रंदाज़ कर देते हैं या डर जाते हैं। हिन्दू धर्म के आराध्य शिवजी का यह बेहद प्रिय है। आइये इसके कुछ लाभ मैं आपको बताऊँ-

      

● इसकी पत्तियों को पानी मे उबालकर उस पानी से सिर धोने से जुएं नही पड़तीं।

● इसी पानी से दर्द और सूजन वाली जगह पर सिकाई करने से बहुत आराम मिलता है।

● इसके पूरे पौधे को लेकर उसे सरसो के तेल में पका लें और उस तेल से जोड़ों की मालिश करने से जोड़ों का दर्द कम होता है।

             Gahari nind aane ke upay

4. बेल

बिल्व या बेल भी शिव जी का प्रिय है और इसे हिन्दू धर्मावलंबी पूजा में प्रयोग भी करते हैं। पैग़म्बर मुहम्मद स. ने इसे जन्नत का दरख़्त कहकर इसकी उपयोगिता में चार चाँद लगा दिये हैं।

                  

● बवासीर में इसकी पत्तियों का चूर्ण अमृत है।

● इसके पके फल का शर्बत पाचनतंत्र के लिए बहुत ही लाभदायक औषधि है।

● इसके फलों का मुरब्बा भी पेट के लिए बहुत फ़ायदेमंद है।

5. काँचनार

यह अक्सर बगीचों में लगा होता है। बेहद खूबसूरत यह पौधा बहुत काम का है। इसकी पत्तियों का आकार थायरॉइड से बहुत मिलता है इसलिए थायरॉइड की समस्या में यह बेहद उपयोगी औषधि है और थायरॉइड के लिए बनाई जाने वाली सभी दवाओं में इसे डाला जाता है। इसकी पत्ती और छाल विशेष उपयोगी होती है जिनका चूर्ण या काढ़ा प्रयोग में लिया जाता है।

                     

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विभिन्न प्रकार के ट्यूमर्स में भी इसकी छाल और पत्तियों का चूर्ण बहुत लाभदायक है।

6. पपीता
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पपीता के पत्तों की आज के समय में बहुत डिमांड है। हर कंपनी इसके पत्तों के रस का एक्सट्रेक्ट बनाकर बेच रही है क्योंकि यह प्लेटलेट्स की संख्या को बड़ी तेज़ी से बढ़ाता है इसलिए यह जानलेवा डेंगू में बहुत उपयोगी है। इसके पत्तों के रस को डेंगू के रोगी को पिलाने से बहुत लाभ होता है।

●पपीता का फल खाने से पाचन सम्बन्धी समस्या खत्म होती है। कब्ज में यह बहुत लाभ करता है।

● पपीता के सूखे बीज आँतों से विष को निकालते हैं और यह अपण्डिसाईटिस में बेहद उपयोगी है।

● पपीता के कच्चे फलों से निकाला गया लेटेक्स या रस ट्यूमर और कैंसर में बहुत लाभदायक है।

7. अनार

अनार एक बहुत स्वादिष्ट फल है। यह विशेषकर खून की कमी के रोगी को हर व्यक्ति खाने की सलाह देता है।

● इसके फल की छाल खूनी बवासीर या अन्य रक्त बहने वाले रोगों में बहुत लाभ पहुँचाती है।

● इसके पत्ते के रस को हथेली और तलवों की जलन में लगाने से बहुत लाभ होता है।

● टायफॉइड और डेंगू में उसकी पत्तियों का काढ़ा बहुत लाभदायक होता है।

8. अर्क

अर्क या अकव्वा/आँकड़ा एक बेहद ही उपयोगी औषधि है। आयुर्वेद में इसे जड़ी बूटियों का पारद कहा जाता है।

                   

● इसकी जड़ की छाल ट्यूमर, सिस्ट, एब्सेस और सभी घावों में बेहद लाभ पहुंचाती है। इसे केवल एक चुटकी की मात्रा में शहद के साथ लिया जाता है।

● इसके पत्तों को गरम करके एड़ी पर बांधने से एड़ियों का दर्द ठीक हो जाता है।

● इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को चुभे हुए कांटे या अन्य कोई वस्तु जैसे काँच आदि पर लगाने से वह स्वतः बाहर निकल आती है।

● इसके फूल की पँखुड़ियों को निकालकर बचे हुए भाग को पान में रखकर चूसने से पीलिया और अन्य यकृत रोगों में बहुत आराम मिलता है।

● इसके फूलों का चूर्ण अर्थराइटिस में बहुत लाभदायक है।


9.चांगेरी

यह बगीचों में या सड़क के किनारे जहां थोड़ी सी नमी होती है वहाँ मिलती है। यह दिल के आकार की पत्तियां भी आयुर्वेद में बहुत उपयोगी मानी गई है।

                    

● इसको घी में पकाकर खाने से गुदा और गर्भाशय के बाहर आने की समस्या में लाभ मिलता है।

● इसी घी को गुदा और योनि में लगाते हैं जिससे प्रोलैप्स की समस्या ठीक होती है।

10.अडूसा

यह भी शानदार औषधीय पौधों में से एक है।

                   

● इसके पत्तों का रस खाँसी और दमे में बहुत ही ज़्यादा असरदार है। शायद ही ऐसी कोई आयुर्वेदिक दवाई खाँसी या अस्थमा की हो जिसमें यह न डाला जाता हो।

● इसके पत्तों का रस और चूर्ण खूनी बवासीर की बहुत असरदार दवाई है। मासिक धर्म में अधिक रक्त आने पर भी यह बहुत उपयोगी साबित होती है।

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11. पुनर्नवा

इस हर्ब का नाम ही इसका महत्व बताता है कि यह शरीर को फिर से नया कर देती है। इसके पौधे का चूर्ण या काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है।


                   


● किडनी के रोगों की यह बेजोड़ दवाई है।

● पथरी को निकालने में यह बहुत मददगार है।

● यकृत(liver) के सभी रोगों में बेहद असरकारक है।

● एनीमिया में भी यह बहुत असरकारी है।

12. भुई आंवला-

इसके फल आँवले के आकार के होते हैं और यह एक छोटा पौधा होता है इसलिए इसे भुई आँवला कहा जाता है। यह बगीचों में या सड़क के किनारे नमी वाली जगह पाया जाता है।

                   

● यकृत के लिए यह अमृत है। इसके पौधे को साफ करके ऐसे ही खाया जा सकता है।

● इसे खाने के कुछ ही देर बाद व्यक्ति को भूख लगने लगती है इसलिए भूख न लगने की समस्या में यह बहुत लाभदायक है।

● पेशाब के इंफेक्शन में यह बहुत लाभदायक है।

● वायरल इन्फेक्शन में यह एक बेजोड़ दवाई है।

● इम्युनिटी बढ़ाने में यह बेहद मददगार है।



Local: Uttar Pradesh, India

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