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Tuesday, 15 May 2018

Baithe Gale ka Gharelu ilaj

बैठ हुये गले के सबसे असरकारक घरेलु उपचार | 
Baithe Gale ka Gharelu ilaj

कारण व लक्षण : Gala kaise kharab hota hai(Karan aur lakshan)

★ अस्पष्ट आवाज (awaz beth jana), कर्कश स्वर (भारी आवाज) को स्वरभंग या गला बैठना(gala baithna) कहते हैं।

★ ठंड लगने या ठंड शरीर में बैठ जाने से आवाज अटकने से होता है।

★ ज्यादा जोर से बोलने या ज्यादा देर तक लगातार बोलने या गाने से भी यह रोग हो जाता है।

★ गले में लकड़ी आदि की चोट के कारण एवं विष या विषयुक्त पदार्थों का सेवन कर लेने से भी गला बैठ जाता है।

★ आवाज का बैठ जाना कोई रोग नहीं होता है परन्तु यह रोग द्वारा उत्पन्न हो सकता है जैसे : गले में कैंसर, हिस्टीरिया और पक्षाघात (लकवा) आदि।

★ खट्टा, चटपटा या ज्यादा मसालेदार चीजें खाने से गला बैठ सकता है। यह चीजें हमारी आवाज को खराब कर देती हैं |

★ अधिक खांसी और गले में जख्म आदि कारणों से भी आवाज बैठ जाती है जिसमें रोगी को बोलते समय गले में जलन सी महसूस होती है। गले में कफ (बलगम) रुक जाता है।

★ शरीर में कमजोरी, खून की कमी, वीर्य आदि के कम हो जाने के कारण भी गले की आवाज खराब हो जाती है।



इसे भी पढ़े :गला बैठना के आयुर्वेदिक अनुभूत प्रयोग | Effective Home Remedies For Hoarseness



विभिन्न औषधियों से उपचार : Gala Kharab Home remedy in hindi

1. बच : gala saaf karne ka nuskha कत्था, बच, कुलंजन और बावची को पीसकर मुंह में रखने से गले में आराम आता है |

2. गुड़ : 10 ग्राम उबलते चावल, 10 ग्राम गुड़ और 40 मिलीलीटर पानी को एक साथ मिलाकर पका लें और पकने पर उसमें घी मिलाकर दिन में 2 बार लें। इससे स्वरभंग में लाभ होता है।

3. खूबकलां : 1 से 2 ग्राम खूबकलां (खाकसीर) के बीज को पानी में डालकर लुआबदार घोल सुबह-शाम पीने से स्वरभंग (गला बैठने पर) दूर हो जाता है।

4. शहतूत : शहतूत के पत्तों के काढ़े से गण्डूस (गरारे) कराने से स्वरभंग (गला बैठने पर) में आराम आता है।

5. मालकांगनी : मालकांगनी, बच, अजवायन, खुरासानी, कुलंजन और पीपल को बराबर मात्रा में लेकर इसमें शहद मिलाकर रोजाना 3 ग्राम चटाने से गले में आराम आता है।

6. मूली के बीज :

• मूली के बीजों को पीसकर गर्म पानी में मिला लें। उसके बाद किसी साफ कपड़े में छानकर रोगी को खिला दें।

• मूली के 12 बीजों को पीसकर गर्म पानी के साथ फांक लेने से गला साफ हो जाता है।

• आवाज बैठ गई हो तो 5 ग्राम मूली के बीजों को गर्म पानी में पीसकर पीने से आवाज खुल जाएगी।

• आधा चम्मच मूली के बीजों को पीसकर गर्म जल के साथ लेने से गला साफ हो जाता है।

• मूली के 5-10 ग्राम बीजों को पीसकर गर्म पानी के साथ दिन में 3-4 बार फंकी लेने से गला साफ होता है।

7. शीतलचीनी :

• स्वरभंग (गला बैठने पर) में शीतलचीनी या कबाबचीनी चबाकर चूसते रहने से गला साफ होता है। गाना गाने वाले लोग इसे गला साफ करने के लिये अक्सर चूसते रहते हैं।

• 10 ग्राम कबाबचीनी को पीसकर 1 ग्राम शहद में मिलाकर दिन में 2 से 3 बार चाटने से बंद आवाज खुल जाती है।

8. कराजनीः स्वऱभंग (गला बैठने पर) में श्वेतकुंजा (कराजनी) के पत्ते कबाबचीनी के साथ मिश्री मिलाकर या अकेले श्वेतगुंजा के साथ सिर्फ मिश्री को मिलाकर चूसते रहने से गले में पूरा आराम होता है।

9. हल्दी : गर्म दूध में थोड़ा हल्दी डालकर पीने से स्वर भेद (मोटी आवाज), बैठी आवाज या दबी आवाज में फायदा होता है।

10. धान : 10 ग्राम चावल, 10 ग्राम गुड़ और 40 ग्राम चीनी को मिलाकर दिन में 3 बार खाने से लाभ मिलता है।

11. जामुन :

• जामुन की मुठली का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर 3 से 4 बार सेवन करना चाहिए।

• जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियां बना लें। यह 2-2 गोली रोजाना 4-4 बार चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है। आवाज का भारीपन ठीक हो जाता है। ज्यादा दिन तक उपयोग करने से बिगड़ी हुई आवाज ठीक हो जाती है। अधिक बोलने, 12. अगस्ता : अगस्ते की पत्तियों के काढ़े से गरारे करने से सूखी खांसी, जीभ का फटना, स्वरभंग तथा कफ के साथ रुधिर निकलने में लाभ होता है।

14. सेहुण्ड : खिरैटी, शतावर और चीनी को शहद के साथ चाटने से स्वरभंग खत्म हो जाता है।

15. शंखपुष्पी : शंखपुष्पी के पत्तों को चबाकर रस चूसने से बैठा हुआ गला ठीक होकर आवाज सुधरती है।

16. लालमिर्च : थोड़ी सी लालमिर्च के साथ बादाम और चीनी मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें और रोज खायें। इससे स्वर भंग (आवाज की खराबी) दूर होता है।

17. अनार :

• अच्छा पका हुआ एक अनार रोज खाना चाहिए। इससे गले की बिगड़ी हुई आवाज कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है।

• पका अनार खाने से दबी हुई गले की आवाज खुल जाती है।

18. अपराजिता : 10 ग्राम अपराजिता के पत्ते, 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर आधा शेष रहने पर सुबह-शाम गरारे करने से, टांसिल, गले के घाव और स्वर भंग में लाभ होता है।

19. अफीम :

• अजवायन और अफीम के डोडे समान मात्रा में लेकर पानी में उबालकर छान लें और फिर छाने हुए पानी से गरारे करें।

• अफीम के डोडे और अजवायन को उबालकर गरारे करने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।

20. आंवला : 1 चम्मच पिसे हुए आंवले की गर्म पानी से फंकी लेने से बैठा हुआ गला खुल जाता है और आवाज साफ आने लगती है।

21. नींबू : गला बैठ जाए या गले में सूजन हो जाये तो ताजा पानी या गर्म पानी में नींबू निचोड़कर और उसमें नमक डालकर गरारे करने से जल्दी लाभ होता है।

22. शलगम : शलगम को पानी में उबाल लें फिर उस पानी को छानकर उसमें शक्कर यानी चीनी को मिलाकर रोजाना 2 बार पीने से बैठे हुए गले में आराम आता है।

23. पानी : 1 भगोने (पतीले) में पानी डालकर उबाल लें। जब पानी में भाप (धुंआ) उठने लगे तो पतीले के ऊपर मुंह करके उसमें से निकलने वाली भाप (धुंए) को गले में खींचने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।

24. अजवाइन : अजवाइन और चीनी को पानी में उबालकर रोजाना सुबह-शाम पीने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।

25. जौ : सुबह-सुबह 25 जौ (जौ गेंहू के जैसे होते हैं) चबाकर निगल जाने से आवाज ठीक हो जाती है।

26. आम : आम के पत्तों के काढ़े में शहद मिलाकर धीरे-धीरे पीने से स्वरभंग में लाभ होता है।

27. कुलंजन :

• 1 ग्राम कुलंजन को पान में रखकर खाने से आराम आता है।

• कुलंजन, मुलेठी, अकरकरा और सेंधानमक बराबर मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को जीभ पर रगड़कर निगल लें।

• कुलंजन को मुंह में रखकर चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।

• 10 ग्राम दक्खनी मिर्च और 10 ग्राम कुलंजन को पीसकर और छानकर उसमें 20 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम चूसें। इससे बंद आवाज खुलने में लाभ होता है।

28. बादाम : 7 बादाम की गिरी और 7 कालीमिर्च को थोड़े से पानी में डालकर और उसमें थोड़ी सी पिसी हुई चीनी मिलाकर चाटने से खुश्की की वजह से बंद हुई आवाज खुल जाती है।

29. सत अजवायन : चने की दाल के बराबर सत अजवायन लेकर पान में रखकर चबाएं और उसका रस निगल लें।

30. नमक :

• गला खराब होने पर सरसों के तेल में नमक को मिलाकर पीयें। इससे वातज के कारण गले का खराब होना ठीक होता है और आवाज साफ हो जाती है।

• गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करने और गले की सिंकाई करने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।

31. छोटी पीपल : भोजन के बाद कालीमिर्च और छोटी पीपल को मिलाकर खाने से कफज के कारण स्वर भंग (आवाज बैठना) में आराम मिलता है।

32. कत्था : 1 ग्राम कत्था को सरसों के तेल में भिगोकर मुंह में रखने से सभी प्रकार का स्वर भंग (गला बैठना) ठीक हो जाता है।

33. छोटी हरड़ : छोटी हरड़ का चूर्ण बनाकर 6 ग्राम चूर्ण को गाय के दूध में मिलाकर 7 से 8 दिनों तक लगातार सेवन करने से गला बैठना व गले का दर्द, खुश्की आदि ठीक हो जाती हैं।

34. मिश्री :

• सौंठ और मिश्री बराबर मिलाकर महीन पीस-छानकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण में शहद मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसकी गोलियों को चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है तथा गले की खुश्की खत्म हो जाती है।

• 1 चम्मच मिश्री, 1 चम्मच घी और 15 दाने पिसी हुई कालीमिर्च के मिलाकर सुबह-शाम चाटने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। ध्यान रहे कि इसे चाटने के कुछ घंटे पानी न पियें।

35. गन्ना : गन्ने को भूनकर तथा छीलकर चूसने से गले की खुश्की व बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है।

36. मुलहठी :

• पान में मुलहठी डालकर रात को सोते समय खायें और सो जायें। सुबह उठने पर आवाज साफ हो जायेगी।

• मुलहठी को मुंह में रखकर उसका रस चूसने से भी गले में आराम आता है।

• सोते समय 1 ग्राम मुलहठी के चूर्ण को मुंह में रखकर कुछ देर चबाते रहे या फिर सिर्फ मुंह में रखकर सो जाएं। सुबह सोकर उठने पर गला जरूर साफ हो जायेगा। अगर मुलहठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर मुंह में रखा जायें तो और भी अच्छा रहेगा इससे सुबह गला खुलने के अलावा गले का दर्द और सूजन भी दूर होती है।

• 3 ग्राम मुलहठी की जड़ का चूर्ण 250 मिलीलीटर दूध को अनुपात से दिन में 2 बार लेना चाहिए और मूल (जड़) को समय-समय पर चूसते रहना चाहिए।

• स्वर भंग में मुलहठी को मुंह में रखकर चूसने से लाभ होता है।

37. छुहारे : सोते समय एक छुहारा उबालकर दूध में लें। इसके सेवन के दो घंटे बाद पानी न पियें। ऐसा करने से आवाज साफ हो जाएगी।

38. अजमोदा : अजमोदा, हल्दी, आंवला, यवक्षार और चित्रक के चूर्ण को शहद तथा घी के साथ चाटने से स्वर भेद दूर होता है। मात्रा 1 से 2 ग्राम तथा दिन में तीन बार देनी चाहिए।

39. अदरक :

• अदरक में छेद करके उसमें एक चने के बराबर हींग भरकर कपड़े में लपेटकर सेंक लें और इसे पीसकर छोटी-छोटी आकार की गोलियां बना लें। 1-1 गोली दिन में 8 बार चूसें।

• अदरक का रस शहद में मिलाकर चूसने से भी गले की आवाज खुल जाती है। आधा चम्मच अदरक का रस प्रत्येक आधा-आधा घंटे के अंतराल में सेवन करने से खट्टी चीजे खाने के कारण बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। अदरक के रस को कुछ समय तक गले में रोकना चाहिए। इससे गला साफ हो जाता है।

• आधा चम्मच अदरक के रस को चौथाई कप गर्म पानी में मिलाकर आधे-आधे घंटे में 4 बार पीने से सर्दी के कारण या खट्टी चीजों के खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। अदरक के रस को गले में कुछ समय तक रोकना चाहिए यानी कि रस को कुछ समय तक निगलना नही चाहिए। इससे गला साफ हो जाता है।

• पिसी हुई कालीमिर्च और घी मिलाकर भोजन करते समय पीने से लाभ होता है।

• अदरक के अंदर छेद करके उसमें थोड़ी सी हींग और नमक भरकर उस अदरक को कपड़े में लपेटकर उसके ऊपर मिट्टी लगा दें और आग में रख दें। जब अदरक पक जाये और खुशबू आने लगे तब आग से निकालकर कपड़े को उतारकर थोड़ी-थोड़ी अदरक को खाने से गला खुल जायेगा और आवाज भी साफ हो जायेगी।

• अदरक के रस में सेंधानमक मिलाकर चाटने से बहुत लाभ होता है।

• अदरक, लौंग, हींग और नमक को मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां तैयार करें। दिन में 3-4 बार एक-एक गोली चूसें।

40. पान :

• चिराग का गुल पान में रखकर खाने से सिंदूर के खाने की वजह से बंद हुई आवाज खुल जाती है।

• पान की जड़ के टुकड़े को मुंह में रखकर 3-4 बार चूसने से गले की आवाज खुल जाती है और गला साफ होता है।

41. इमली :

• 1 ग्राम पुरानी इमली के फल का चूर्ण 4 से 6 ग्राम शहद के साथ दिन में 2 बार लेना चाहिए।

• 1 ग्राम पुराने फलों के चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से लाभ मिलता है।

42. प्याज : प्याज को आग में दबाकर उसका भुरता बना लें। रोगी को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग भुना सुहागा खिलाकर ऊपर से प्याज का भुरता खिलाने से स्वरभंग (आवाज़ का खराब होना) ठीक हो जाता है।

43. लहसुन :

• गरम पानी के साथ लहसुन का रस मिलाकर गरारे करने से फायदा होता है।

• एक कली लहसुन का रस और फूली हुई फिटकरी को पानी में डालकर कुल्ला करने से बैठी हुई आवाज में लाभ होता है।

• लहसुन को दीपक की लौ में भूनकर पीस लें। उसमें मुलहठी का चूर्ण मिला लें। फिर 2 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से बैठी हुई आवाज ठीक हो जाती है।

• गर्म पानी में लहसुन का रस मिलाकर सुबह-शाम गरारे करने से गले में लाभ होता है।

• लहसुन को पीसकर गर्म पानी में मिलाकर बार-बार गरारे करने से सिर्फ 2-3 बार में ही गला साफ हो जाता है। एक बार में कम से कम 10 मिनट तक लगातार गरारे करें।

44. सिरस : सिरस की छाल और हल्दी दोनों पीसकर, तेल में सेंककर, गले पर लेप करके, रूई लगाकर, पट्टी बांधकर रात को सोयें। सुबह गला खुल जायेगा।

45. सुहागा :

• सुहागा पीस लें इसकी चुटकी भर चूसने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।

• जिन लोगों का गला ज्यादा जोर से बोलने के कारण बैठ गया हो उन्हें कच्चा सुहागा आधा ग्राम (मटर के बराबर सुहागे का टुकड़ा) मुंह में रखने और चूसते रहने से स्वरभंग (बैठे हुए गला) में 2 से 3 घंटों में ही आराम हो जाता है।

• 5 से 10 मिलीलीटर ऊंटकटोरे का मूल स्वरस (जड़ का रस) अकेले या सुहागे की खील (लावा) के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से स्वरभंग (गला बैठने पर) ठीक हो जाता है।

• स्वरभंग (गला बैठने पर) होने पर सुहागे की टिकिया चूसते रहने से गले में जल्दी आराम आता है।

46. बेर :

• बेर की जड़ को मुंह में रखना चाहिए अथवा बेर के पत्तों को सेंककर सेंधानमक के साथ खाना चाहिए। इससे बहुत लाभ मिलता है।

• बेर के पेड़ की छाल का टुकड़ा मुख में रखकर उसका रस चूसने से दबी हुई आवाज 2-3 दिन में ही खुल जाती है।

47. तुलसी : स्वरभंग (गला बैठना) में तुलसी की जड़ को मुलेठी की तरह चूसते रहने से लाभ मिलता है।

48. ब्राह्मी : ब्राह्मी की जड़ 100 ग्राम, मुनक्का 100 ग्राम और शंखपुष्पी 50 ग्राम को चौगुने पानी में मिलाकर रस निकाल लें। इस रस का सेवन करने से शरीर स्वस्थ होता है और आवाज भी साफ होती है।

49. शहद :

• 1 कप गर्म पानी में 1 चम्मच अच्युताय हरिओम संजीवनी शहद डालकर गरारे करने से आवाज खुल जाती है।

• फूली हुई फिटकरी को पीसकर शहद के साथ मिलाकर पानी मिलाकर कुल्ले किये जा सकते हैं।

• मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ चाटना चाहिए।

• 3 से 9 ग्राम की मात्रा में बहेड़ा के चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्वरभंग (गला बैठना) और गले के दूसरे रोग भी ठीक हो जाते हैं।

50. सफेद जीरा : आधे से 2 ग्राम सफेद जीरे को रोजाना 2 बार चबाने से स्वरभंग (बैठा हुआ गला) ठीक हो जाता है।

51. पीपल : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम पीपल के चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्वरभंग (बैठा हुआ गला) ठीक हो जाता है।

52. सोंठ : सोंठ और कायफर (कायफल) को मिलाकर काढ़ा तैयार कर ले और इस काढ़े को सुबह-शाम सेवन करने और काढ़े से गरारा करने से आराम आता है।

53. लताकस्तूरी : लताकस्तूरी के बीजों के चूर्ण के धूम्रपान से स्वरभंग (गला बैठने पर) में लाभ होता है।

54. गुड़ : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम गुग्गुल को गुड़ के साथ रोजाना 3 से 4 बार लेने से गले में आराम आता है।

55. कचूर : कचूर को मुंह में रखकर चबाने से या चूसते रहने से गला साफ और आवाज मीठी हो जाती है। गाना गाने वाले लोग ज्यादातर इसका प्रयोग करते हैं।

56. तालीसपत्र: स्वरभंग (गला बैठने पर) में तालीसपत्र (अबीस वेभइआना लाइंड) का काढ़ा या फांट सुबह-शाम सेवन करने से गले में आराम आता है।

57. शोधित कुचला : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग शोधित कुचले का चूर्ण सुबह-शाम सेवन करने से ज्यादा बोलने के कारण पैदा हुआ स्वरभंग (गला बैठने पर) ठीक हो जाता है।

58. बतासे : 5 से 10 बूंद कायापुटी का तेल बतासे या चीनी पर डालकर रोजाना 3 से 4 बार सेवन करने से स्वरभंग (गला बैठने पर) ठीक हो जाता है।

59. कालीमिर्च :

• कालीमिर्च और मिश्री एक साथ चबाकर खाने से या दोनों को मिलाकर चूर्ण बनाकर चुटकी भर चूर्ण रोजाना 3 से 4 बार मुंह में रखकर चूसते रहने से गला जल्दी से बिल्कुल साफ हो जाता है।

• गला बैठने पर पिसी हुई कालीमिर्च और घी को पानी में मिलाकर भोजन करते समय पीने से लाभ होता है।

• कालीमिर्च 10 ग्राम और इतनी मात्रा में मुलेठी तथा 20 ग्राम मिश्री। इनको पीसकर सुबह-शाम रोज चुटकी भर लेकर और शहद में मिलाकर खाने से आवाज साफ और सुरीली हो जाती है।

• रात को सोते समय 12 कालीमिर्च के दाने और बताशे लेकर हर बताशे के अंदर 2 कालीमिर्च रखकर चबाकर सो जायें। इसके ऊपर पानी न पीयें। इससे सर्दी-जुकाम से बैठा हुआ गला(awaz beth jana) ठीक हो जायेगा।

60. हींग :

• थोड़ी सी हींग को गर्म पानी के साथ खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है।

• जुकाम का पानी गले में गिरने या जलवायु परिवर्तन (हवा, पानी बदलना) से आवाज बैठ जाये तो आधा ग्राम हींग को गर्म पानी में घोलकर दो बार गरारे करने से आवाज ठीक हो जाती है।

Wednesday, 2 May 2018

fitkari gud ka khajana

फिटकरी 

फिटकरी का उपयोग हम लोग बरसों से देखते आए है। हमारे पिताजी या दादाजी के शेविंग बॉक्स मे फिटकरी का एक टुकड़ा रहता था जिसे वो शेव करने के बाद दाढ़ी पर मलते थे।

 ये उनका आफ्टर शेव था जिससे उनका चेहरा हमेशा दमकता हुआ और झुर्रियों रहित रहता था। 

ये फिटकरी का कमाल था। 
फिटकरी को अंग्रेजी में एलम (alum) कहते है।

 ये दरअसल पोटेशियम अलुमिनियम सल्फेट है। 

इसमें कई प्रकार के औषधीय गुण होते है। 
इसमें चोट लगने पर खून बहना बंद करने का विशेष गुण होता है तथा साथ ही ये एंटीसेप्टिक और एंटी बैक्टीरियल की तरह काम करती है । 

                                    

इन्ही गुणों की वजह से इसे शेविंग के बाद दाढ़ी पर मलते है। आज भी गावों में यही परम्परा है। 

गंदे पानी में फिटकरी डालने से पानी की गंदगी अलग हो जाती है। 

ये सामान्य उपयोग लगभग सभी जानते है।

 लेकिन फिटकरी के सिर्फ ये ही गुण नहीं है। फिटकरी के गुण और फायदे की एक लम्बी लिस्ट बनाई जा सकती है। 
फिटकरी के 20 शानदार उपयोग व फायदे...

पनीर बनाने के लिए दूध को पिसी हुई फिटकरी डालकर फाड़ें । इस प्रकार बना हुआ पनीर अधिक स्वादिष्ट व मुलायम बनता है।

पशु पक्षी आदि को लगी चोट में फिटकरी फायदेमंद होती है। पतंग के मांझे से घायल पक्षी को लगी चोट फिटकरी घुले पानी से धोएँ। ये पानी उसे थोड़ा सा पिला दें। इससे पक्षी जल्दी ठीक हो जाएगा। इसी प्रकार पशु को लगी चोट भी ठीक हो सकती है।

यदि पसीना अधिक आता हो तो नहाने के पानी में फिटकरी घोलकर नहाएँ। पसीना आना कम हो जाएगा। शरीर से बदबू आती हो तो वो भी मिट जाएगी।

चेहरे की झुर्रियाँ मिटाने के लिए फिटकरी के टुकड़े को पानी में डुबोकर चेहरे पर हल्के हाथ से मलें। सूखने पर सादा पानी से धो लें। कुछ ही दिन में झुर्रियां मिट जाएँगी।

यदि जहरीला कीड़ा या बिच्छू काट ले तो पानी में फिटकरीका पाउडर डालकर गाढ़ा घोल बनाकर लगाने से आराम मिलता है।

दांत में दर्द हो तो फिटकरी और काली मिर्च बराबर मात्रा में पीस कर इसे लगाएं। इससे दर्द कम हो जाता है।

गर्म पानी में फिटकरी और नमक मिलाकर गरारे व कुल्ला करने से गले की खराश ,मुंह की बदबू आदि ठीक हो जाते है।

मसूड़ों से खून आता हो तो फिटकरी घुले पानी के कुल्ला करने से ठीक होता है।

शरीर पर लगी छोटी चोट से खून बह रहा हो तो फिटकरीका पाउडर चोट पर छिड़कने से खून रिसना बंद हो जाता है।

सिर में जुएँ हो गई हों तो फिटकरी मिले पानी से कुछ दिन सिर धोने से जुएँ खत्म हो जाएँगी।

बवासीर में फिटकरी का पाउडर मक्खन में मिलाकर मस्सों पर लगाएं ,लाभ होगा। फिटकरी मिले पानी से गुदा को भी चार पांच बार धोएँ। एक टब में फिटकरी मिला हुआ गुनगुना पानी भर लें। इसमें बैठ कर सिकाई करने से बवासीर में आराम मिलता है।इन उपायों को करने से खूनी बवासीर भी ठीक हो जाते है।

नकसीर आने पर फिटकरी के गाढ़े घोल ( पानी में ) में रुई डुबोकर नाक में लगाने से नकसीर बंद हो जाती है। इस घोल की दो-दो बूंद नाक में डालने से भी नकसीर बंद होती है।

सूखी खांसी , कफ वाली खांसी या दमा की शिकायत हो तो फिटकरी को पीस कर तवे पर भून लें। इस भुनी फिटकरीमें दुगनी मात्रा पिसी हुई मिश्री मिला दें। ये मिश्रण आधा चम्मच सुबह शाम कुछ दिन लेने से बहुत लाभ होगा।

दस्त होने पर बील के जूस में दो चुटकी फिटकरी मिलाकर पीने से दस्त बंद हो जाते है।

घाव के लिए फिटकरी को भूनकर पीसकर घी में मिला लें। इसे घाव पर लगाने से घाव मिट जाता है।

                                      

सर्दी में हाथ पैरों में सूजन व जलन हो तो गर्म पानी में फिटकरी घोलकर इससे दिन में दो तीन बार धोएँ। आराम मिलेगा।

बुखार होने पर आधा चम्मच सौंफ के पाउडर में दो चुटकी पिसी फिटकरी मिलाकर बताशे के साथ खाने से बुखार उतर जाता है।

जंगल सफारी , ट्रैकिंग या कैंप आदि के लिए जाते समय अपने साथ फिटकरी जरूर ले जाएँ। बहुत काम आ सकती है।

                              

Ghamori Treatment in Hindi

Haldi ka pani amrt

हल्दी का पानी अमृत

पानी में हल्दी मिलाकर पीने से होते है यह फायदें

                      
1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है. सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है.

2. रोज यदि आप हल्दी का पानी पीते हैं तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है और खून जमता भी नहीं है. यह खून साफ करता है और दिल को बीमारियों से भी बचाता है.

3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है. हल्दी के पानी में टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है. हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं.

4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए. हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है. जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है.

5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है. हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते हैं.

6. शरीर में किसी भी तरह की सजून हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें. हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असाहय दर्द को ठीक कर देता है. सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी.

                      

7. कैंसर खत्म करती है हल्दी. हल्दी कैंसर से लड़ती है और उसे बढ़ने से भी रोक देती है. हल्दी एंटी.कैंसर युक्त होती है. यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीएगें तो आपको भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगें.

अधिक जानकारी के लिए
Ghamori Treatment in Hindi



Sunday, 1 April 2018

Muh ke Chhale ka Gharelu nuskhe

  • मुह के छाले दूर करने के घरेलु नुस्खे
  • Muh ke Chhale ka Gharelu nuskhe
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★ भोजन में तीखे मसाले, घी, तेल, मांस, खटाई आदि अधिक मात्रा में खाने से पेट की पाचनक्रिया खराब हो जाती है जिससे मुंह व जीभ पर छाले पड़ जाते हैं। पेट में कब्ज होने से या गर्म पदार्थ खाने से गर्मी के कारण मुंह में छाले, घाव व दाने निकल आते हैं। ये छाले लाल व सफेद रंग के होते हैं।
मुंह के छालों का कारण :

★ मुंह में छाले(Muh ke Chale / Mouth Ulcers) अपचन व कब्ज के कारण होता है।

★ पेट की पाचनक्रिया खराब होने का कारण घी, तेल, मिर्च, खटाई, मांस तथा अधिक मसालेदार व अम्ल रस से बने खाद्य-पदार्थ आदि अधिक सेवन करना है, जिससे पेट में कब्ज बनने के कारण पाचनक्रिया खराब होकर मुंह में छाले, घाव, दाने आदि उत्पन्न हो जाते हैं।
     
   

  • भोजन तथा परहेज :


★ दांतों में गंदगी से भी मुंह में छाले पैदा हो जाते हैं अत: दिन में 2 से 3 बार दांत साफ करना जरूरी है।

★ भोजन में लालमरसा का साग खायें।

★ मुंह के छाले होने पर 2 केले रोजाना सुबह दही के साथ खायें।

★ छाले होने पर टमाटर अधिक खाने चाहिए।

★ ठण्डी फल व सब्जियां खायें।

★ पेट की कब्ज खत्म करने के लियें सुबह २ से ३ गिलास पानी शौच जाने से पहले पीने से लाभ होता है।

★ भोजन में अधिक तेल, मिर्च, मांस, तेज मसाले व गर्म पदार्थ न खायें।

★ पेट में कब्ज होने पर छाले बनते हैं। पेट में कब्ज को बनाने वाले कोई भी पदार्थ न खाएं। अधिक गरिष्ठ भोजन न करें।

★ चाय, शराब, बीड़ी-सिगरेट या किसी भी नशीली चीज का सेवन न करें।


  • मुंह के छालों का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार : 
  • muh ke chale ke Ayurvedic gharelu nuskhe in hindi
 

1. विडंगभेद : विडंगभेद के पत्तों को सौंठ के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस 40 मिलीलीटर काढ़े को खुराक के रूप में रोजाना सुबह-शाम कुल्ला व गरारा करने से मुंह आने का रोग (छाले) ठीक हो जाता है।

                              

 2. बड़ी माई : बड़ी माई की फांट या घोल से कुल्ला करने एवं मुंह में रखने से मुंह में होने वाले छाले व दांत और मसूढ़ों के कारण उत्पन्न होने वाले रोग ठीक हो जाते हैं।

3. सोंठ : सोंठ और कायफल को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसके काढ़े को पीने व छालों पर लगाने से मुंह के आने का रोग (छाले) मिट जाता है।

4. रसौत : रसौत में शहद मिलाकर मुंह के अंदर रखने से मुंह के दाने व मुंह का आना ठीक हो जाता है।

5. गुग्गुल : गुग्गुल को मुंह में रखने से या गर्म पानी में घोलकर दिन में 3 से 4 बार कुल्ला व गरारे करने से मुंह के अंदर के घाव, मुंह की जलन व छाले ठीक हो जाते हैं।

6. जटामांसी : मुंह में छाले होने पर जटामांसी के टुकड़े को मुंह में रखकर चूसते रहने से मुंह की जलन एवं पीड़ा कम हो जाती है।

7. कबाबचीनी (शीतल चीनी) :

• 1 से 4 ग्राम कबाबचीनी का चूर्ण रोजाना सुबह-शाम खाने एवं मुंह में रखकर चूसते रहने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

• कबाबचीनी और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

                                     

8. कंटकारी : मुंह में छाले व पीड़ा होने पर कंटकारी (भटकटैया, रेंगनी कांट) के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से लाभ होता है।

9. आक का दूध : आक के दूध को शहद में मिलाकर मुंह के छालों में लगाने से आराम मिलता है।

10. सहजना (मुनगा) : सहजना की छाल का काढ़ा बनाकर गरारा करने से मुंह के छाले और पीड़ा आदि खत्म हो जाते हैं।

11. लहसुन :

• लहसुन की 2 कलियों का रस निकालकर 1 गिलास पानी में मिलाकर कुल्ला करें। रोजाना 4 से 5 दिन तक इसका प्रयोग करने से मुंह के छाले कम हो जाते हैं।

• लहसुन की कली को पानी के साथ पीसकर उसमें थोड़ा-सा देसी घी मिलाकर मलहम तैयार करें। इस मलहम को छालों पर लगाने से छाले खत्म हो जाते हैं।

12. हरीतकी : हरीतकी का काढ़ा बनाकर तैयार काढ़े को मुंह में रखकर गरारे करने से मुंह के घाव व छाले ठीक हो जाते हैं।

13. श्वेतगुंजा (करजनी) : श्वेतगुंजा (करजनी) के पत्तों को चबाकर चूसते रहने से मुंह के छालों में आराम मिलता हैं।

14. रोहिनी (मांस रोहिनी) : रोहिनी (मांस रोहिनी) की छाल का काढ़ा बनाकर रोजाना 2 बार कुल्ला करने से मुंह व जीभ के छाले खत्म हो जाते हैं।

15. धमासा : मुंह में छाले व घाव होने पर धमासा का काढ़ा बनाकर दिन में 3 से 4 बार कुल्ला करने से मुंह से पीब आना, छाले व घाव ठीक हो जाते हैं।

16. जूही के पत्ते :

• जूही के पत्तों को चबाने से मुंह के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।

• जूही के पत्ते, त्रिफला और दारुहल्दी का काढ़ा बनाकर रोजाना 2 बार कुल्ला करने से मुंह के घाव व छाले ठीक हो जाते हैं।

17. गुलकन्द : गुलकन्द (गुलाब पंखड़ियों से बना) को मुंह के छाले व घाव पर लगाने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।

18. कदम : मुंह के रोग में कदम की छाल या पत्तों का काढ़ा बनाकर रोजाना 2 से 3 बार गरारा करने से रोग में आराम मिलता है।

19. अड़हुल (गुड़हल) : मुंह के रोग में अड़हुल के फूल या पत्तों को चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

20. पीपलवृक्ष : पीपलवृक्ष की छाल के काढ़ा से गरारे व कुल्ला करने से मुंह के घाव व छाले ठीक हो जाते हैं।

21. पाकर (पासर) : पाकर की छाल के काढ़े से दिन में 2-3 बार गरारे करने से मुंह के छालों के रोग में आराम मिलता है।

22. बबूल : बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में 2 से 3 बार गरारे करने से मुंह के छाल ठीक हो जाते हैं।

23. मोखा (एकसिरा) : मोखा का क्षार (रस) लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से मुंह के जख्म और छाले आदि समाप्त हो जाते हैं।

24. जारुल : मुंह में छाले, घाव आदि होने पर जारुल का फल चबाने से लाभ होता है।

25. तेन्दू : तेन्दू के फल को फांट (पानी में फेंटकर) से कुल्ला करने से मुंह के छालों में लाभ होता है।

26. जामुन :

• मुंह में घाव(Muh ke Chale / Mouth Ulcers), छाले आदि होने पर जामुन की छाल का काढ़ा बनाकर गरारे करने से मुंह के छालों के रोग में लाभ होता है।

• 50 ग्राम जामुन के पत्ते पानी के साथ पीसकर 300 मिलीलीटर पानी में मिलाकर रख लें। फिर इसके पानी को छानकर कुल्ला करने से छाले नष्ट होते हैं।

27. हीरा बोल : हीरा बोल को पानी में घोलकर इसके घोल से बार-बार कुल्ला करने से मुंह के छाले जल्द ठीक हो जाते हैं।

28. लालमरसा : लालमरसा का साग खाने से या इसके पत्तों को चबाने से मुंह के छाले व घाव नष्ट हो जाते हैं।

29. कुन्दरु (कुन्दरी) : मुंह व जीभ के छालों में कुन्दरु (कुन्दरी) फल को चबाने से रोग में लाभ होता है।

30. चाल्ता (भव्य) : मुंह के छालों में चाल्ता (भव्य) के फल खाने से छाले ठीक हो जाते हैं। इसके फलों का शर्बत बनाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से शौच साफ आती है और मुंह के छाले आदि ठीक होते हैं।

31. माजूफल :

• माजूफल के टुकड़े को सुपारी की तरह चबाते रहने से मुंह के छाले व दाने आदि खत्म हो जाते हैं।

• माजूफल, कत्था, वंशलोचन तथा छोटी इलायची के दाने 5-5 ग्राम लेकर कूट-छानकर चूर्ण बना लें। इस 1 चुटकी चूर्ण को बच्चे के मुंह में सुबह-शाम छिड़कने से बच्चों के मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

32. हरी दूब : हरी दूब के काढ़े से बार-बार कुल्ला करने से मुंह के छाले मिट जाते हैं।

33. त्रिफला (बहेड़ा, हरड़ और आंवला) :

• पेट में कब्ज होने पर त्रिफला के चूर्ण को गर्म दूध या गर्म पानी के साथ रोजाना रात को पीयें। लगातार 3 से 4 दिन सेवन करने से मुंह के छाले व दाने खत्म हो जाते हैं।

• हरड़, बहेड़ा, आंवला, दारुहल्दी और सौंफ को 15-15 ग्राम की मात्रा में लेकर गर्म पानी में उबाल लें। इसके बाद उस पानी में थोड़ा-सा शहद मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के छाले मिट जाते हैं।

34. वंशलोचन : मुंह के छालों में वंशलोचन के साथ शहद मिलाकर लगाने से छालों में आराम रहता है।

35. अड़ूसा (वासा) :

• यदि केवल मुंह में छाले हों तो अड़ूसा के 2-3 पत्तों को चबाकर उसके रस को चूसने से लाभ होता है।

• अड़ूसा की लकड़ी की दातुन करने से मुंह के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

• अड़ूसा के 50 मिलीलीटर काढ़े में 1 चम्मच गेरू और 2 चम्मच शहद को मिलाकर मुंह में रखने से मुंह के छाले और नाड़ीव्रण नष्ट होते है।

                           

• अड़ूसा के पत्तों को पान के समान चबाकर उसके रस को चूसने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

• मुंह में छाले होने पर अड़ूसा के 20 ग्राम पत्तों को मुंह में रखकर चूसने से छाले व दर्द में आराम रहता है।

36. बेर : 50 ग्राम बेर के पत्तों को 300 मिलीलीटर पानी में मिलाकर उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े से रोजाना कुल्ला करने से मुंह के छाले व दाने नष्ट हो जाते हैं।

37. फिटकरी : लगभग 1 ग्राम भुनी फिटकरी, लगभग आधा ग्राम कत्था पापरी, लगभग आधा ग्राम इलायची के दाने और लगभग आधा ग्राम शीतल चीनी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। इसके चूर्ण को छालों पर लगाने से मुंह के छाले व जलन दूर हो जाती है।

38. करेला :

• करेले के रस में चाक मिट्टी पीसकर घोल लें। इसके घोल को दांतों पर मलने से मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

• मुंह के छालों में करेले का रस निकालकर इसमें पिसी हुई फिटकरी डालकर हल्का गर्म करके दिन में 2 बार कुल्ला करने से रोगी को आराम मिलता हैं।

39. लौंग : लौंग और इलायची को एक साथ मुंह में रखकर चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

40. छाछ : दही के पानी या छाछ से कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

41. सत्यानाशी : सत्यानाशी की टहनी तोड़कर मुंह में लगाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

42. हरा पोदीना : हरा पोदीना, सूखा धनिया और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर चबायें और लार को नीचे टपकने दें। इससे मुंह के छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं।

43. हल्दी : 

• हल्दी व वंशलोचन को एक साथ पीसकर मुंह के छालों पर लगाने से लाभ होता है।

• 15 ग्राम पिसी हुई हल्दी को 1 लीटर पानी में उबालें। इस पानी से रोजाना सुबह-शाम गरारे करने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।

44. जायफल-

• जायफल के रस में पानी मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

• जायफल के काढे़ से दिन में 3-4 बार गरारें करने से मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

45. लालमिर्च : लाल मिर्च को पानी में घोलकर या काढ़ा बनाकर पीने से मुंह के छाले व घाव जल्द ठीक हो जाते हैं।

46. तरबूज : तरबूज के छिलके को जलाकर उसकी राख को छालों पर लगाने से मुंह के छाले मिट जाते हैं।

47. सफेद कत्था : सफेद कत्था 3 ग्राम, छोटी इलायची के दाने 3 ग्राम, शीतलचीनी 3 ग्राम और नीलाथोथा (भस्म) 1 ग्राम को बारीक कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को मुंह के छालों पर लगाने से पुराने छाले भी ठीक हो जाते हैं।

   


48. मसूर : मसूर की राख और कत्था बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर मुंह के छालों पर लगाने से मुंह के छाले व घाव खत्म हो जाते हैं।

49. शीतलचीनी : 5-5 ग्राम शीतल चीनी, कपड़िया कत्था, वंशलोचन और 4 छोटी इलायची के दानों को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। यह 1 चुटकी चूर्ण बच्चे के मुंह में सुबह और शाम छिड़कने से बच्चों के मुंह में होने वाले छाले खत्म हो जाते हैं।

                               

50. मुरदासिंगी : मुरदासिंगी, वंशलोचन, चौकिया सुहागा तथा कत्था को पीसकर गाय के घी में मिलाकर छालों पर लगाने से छाले नष्ट हो जाते हैं।

51. आंवला :

• आंवला के चूर्ण में लहसुन की 1 कली को भूनकर चूर्ण बनाकर मिश्रण बना लें। इस मिश्रण को 2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेट की कब्ज खत्म होकर छाले भी खत्म हो जाते हैं।

• आंवला के पत्तों का काढ़ा बनाकर मुंह में कुछ देर रखकर गरारे व कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

• 25 ग्राम आंवला, 10 ग्राम सौंफ, 5 ग्राम सफेद इलायची और 25 ग्राम मिश्री को कूटकर चूर्ण बना लें। इस 2 चुटकी चूर्ण को खुराक के रूप में रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मुंह के छाले मिट जाते हैं।

52. सुहागा :

• भुना हुआ सुहागा बारीक पीसकर 1 चुटकी की मात्रा में ग्लिसरीन या देशी घी में मिलाकर छालों पर लगाने से लाभ होता है।

• 2 ग्राम भुने सुहागा के बारीक चूर्ण को 15 ग्राम ग्लिसरीन में मिलाकर रखें। इस मिश्रण को दिन में 2 से 4 बार मुंह के छालों पर लगाने से मुंह के छालों के रोग में आराम मिलता है।

53. टमाटर :

• जिन लोगों के मुंह में बार-बार छाले होते हों, उन्हे टमाटर अधिक सेवन करने चाहिए। छालों के लिए टमाटर औषधि का काम करते हैं। टमाटर के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करने से भी मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

• आधा गिलास टमाटर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर घोल बनाकर बार-बार कुल्ला करने से मुंह के सभी रोग ठीक होते हैं।

54. शहतूत : 1 चम्मच शहतूत के रस को 1 कप पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

55. तुमरु :

• तुमरु के बीज को जीभ पर रखने से त्वचा में ठंडक व चुनचुनाहट-सी होती है। थोड़ी देर बाद लार निकलने से दर्द बंद हो जाता है और छाले मिट जाते हैं।

• तुमरु के बीज को पीसकर छालों पर लगाकर थोड़ी देर बाद थूकने से छाले व दर्द खत्म हो जाते हैं।

56. जीरा : छालों के कारण मुंह में दर्द या जलन आदि होने पर जीरे को भूनकर इसमें सेंधानमक को बराबर मात्रा में मिलाकर मुंह में लगाने से लाभ होता है।

57. मेंहदी :

                              

• 50 ग्राम मेंहदी को 2 गिलास पानी में भिगो लें। कुछ समय के बाद इस पानी से कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

• मेंहदी के पत्तों को मुंह में रखकर चबाने से भी मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

• मेंहदी के 20 ग्राम पत्तों को रात को सोते समय पानी में भिगोकर रखें। सुबह इस पानी से कुल्ला करने से मुंह के छाले नष्ट हो जाते हैं।

58. बबूल : बबूल की छाल को सुखाकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। मुंह के छालों पर इस चूर्ण को छिड़कने से कुछ दिनों में ही छाले ठीक हो जाते हैं।

59. मुनक्का : पानी में मुनक्का के 8 से 10 दानों को रात में भिगोकर रख दें। सुबह मुनक्का फूल जाने पर इसे छानकर चबा-चबा कर खायें। रोजाना सुबह इसको खाने से मुंह के छाले व घाव ठीक हो जाते हैं।

60. पान की पत्ती : मुंह में छाले हो जाने पर पान की पत्ती को सुखाकर चबाने से लाभ होता है।

61. नीम :

• नीम की नई कोमल पत्तियों को दिन में 3 से 4 बार चबाने से मुंह के छालों में लाभ होता है।

• नीम और कत्थे को अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बनाकर बना लें। इसके चूर्ण को छालों पर लगाकर लार को टपकाने से मुंह के छाले नष्ट हो जाते हैं।

• नीम की पत्तियों को पानी में उबाल लें। इस पानी से बार-बार कुल्ला करने से मुंह के छाले व घाव नष्ट हो जाते हैं।

• थोड़ी-सी नीम की पत्तियों को पीसकर देशी घी में मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने से छाले नष्ट हो जाते हैं।

62. सफेद इलायची : 3 ग्राम सफेद इलायाची, 2 ग्राम कबाबचीनी तथा 3 ग्राम कत्था को एक साथ खरल में बारीक कूटकर मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।

63. दही : रोजाना सुबह मुंह के छालों पर दही मलने से छाले कुछ ही समय में मिट जाते हैं।

                             

64. गुरुकुल कांगड़ी : गुरुकुल कांगड़ी की चाय को उबालकर उस पानी से 2 से 3 बार कुल्ला करने से छाले समाप्त हो जाते हैं।

65. चिरमी के फूल : चिरमी के फूल का चूर्ण बनाकर इसके चूर्ण को घी या मक्खन में मिलाकर छालों पर लगायें। इसको रोजाना 2 से 3 बार छालों पर लगाने से छाले जल्दी खत्म हो जाते हैं।

66. झरबेरी : झरबेरी के पत्तों को पानी में उबाल लें। इस पानी से रोजाना 2 बार कुल्ला करने से मुंह का दर्द व छालों में आराम मिलता है।

67. शहद : शुद्ध शहद को पानी मे मिलाकर छालों पर लगाने से छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं।

68. सोनागेरु : सोनागेरु, मिस्री, कत्था व इलायची को 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर और कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण में 3 ग्राम फूला हुआ नीलाथोथा मिला लें। इस चूर्ण को दिन में 3 से 4 बार छालों पर मलने और इसके बाद चाय के पानी से कुल्ला करने से लाभ होता है।

69. इन्द्र जौ : 10-10 ग्राम की मात्रा में इन्द्र जौ और काला जीरा को लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छालों पर दिन मे 2 बार लगाने से छाले नष्ट हो जाते हैं।

70. हरीतकी : हरीतकी का काढ़ा बनाकर गरारे करने से मुंह के छाले और घाव ठीक हो जाते हैं।

71. बरगद : 30 ग्राम बरगद की छाल को 1 लीटर पानी में उबालकर गरारे करने से मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

72. मुगवन (बनमंग) : काकामाची मकोय के पत्ती और मुगवन को मिलाकर पकायें और भोजन के साथ खा लें। इससे मुंह के छाले कुछ ही समय में ठीक हो जाते हैं।

72. पुनर्नवा :- पुनर्नवा की जड़ को दूध में घिसकर मुंह के छालों में लगाने से आराम मिलता है।

73. शिलाजीत : मुंह व जीभ पर छाले होने पर 125 से 325 ग्राम शिलाजीत में मक्खन या घी को मिलाकर दिन में 2 बार खाने से छाले खत्म हो जाते हैं।

74. पडिकार : 100 से 300 ग्राम पडिकार में मक्खन या घी मिलाकर दिन में 2 बार खाने से मुंह व जीभ के रोग ठीक हो जाते हैं।

75. चमेली :

• चमेली के 20-25 पत्ते मुंह में चबाकर थूकते रहने से मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।

• मुंह में छाले, घाव या किसी प्रकार के दाने हो जाने पर, चमेली के पत्तों को मुंह में रखकर पान की तरह चबाने से लाभ होता है।

76. हरड़ –

• छोटी हरड़ को बारीक पीसकर छालों पर लगाने से मुंह व जीभ के छालें मिट जाते हैं।

• छोटी हरड़ को रात को भोजन करने के बाद चूसने से मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

• पिसी हुई हरड़ को 1 चम्मच की मात्रा में रोजाना रात को सोते समय गर्म दूध या गर्म पानी के साथ फंकी लेने से छालों में आराम मिलता है।

• छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर 3 बार रोज लगाने से आराम मिलता है।

77. दारूहल्दी :

• दारुहल्दी, मुलेठी और शहद को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाकर छालों पर बार-बार लगाने से आराम मिलता है।

• 20 ग्राम दारुहल्दी को लेकर 300 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को छानकर दिन में 2-3 बार कुल्ला करने से मुंह के घाव, छाले और दाने समाप्त हो जाते हैं।

78. मकोय :- मकोय के 5 से 6 पत्तों को चबाने से मुंह और जीभ के छालों में आराम मिलता है।

79. धनिया :

• धनिये को बारीक पीसकर खाने के सोडे के साथ मिला लें। इस मिश्रण को मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।

• हरे धनिये की पत्तियों को चबाने से मुंह के छाले नष्ट हो जाते हैं।

• सूखे धनिये और शहतूत को पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

• धनिये के 50 दानों को पीसकर सरसों के तेल में पका लेना चाहिए। फिर कपड़े से छानने के बाद रूई की फुरेरी से इस तेल को जीभ पर लगाना जरूरी होता है। इसे लगाने के तुरंत बाद मुंह खोलकर लार टपका देना जरूरी होता है। दिन में 4 बार यह क्रिया करने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।

• तालु में छाले आंतों की गर्मी से निकल आते हैं। ऐसी दशा में रोगी को भोजन करना कठिन हो जाता है। इसके लिए रोगी को धनिये के पानी से कुल्ले करने चाहिए। सबसे पहले 50 ग्राम धनिये को 2 लीटर पानी में पका लें। इसके बाद इस पानी को छानकर कुल्ला करना चाहिए। दिन में 3 बार कुल्ला करने से रोगी को काफी आराम मिलता है। भोजन में मीठा दलिया, मूंग की दाल की रोटी, दूध, चाय आदि लेना चाहिए। छालों की जितनी अधिक सिंकाई होगी, उतना ही आराम मिलेगा। धनिये के पानी में ग्लिसरीन मिलाकर फुरेरी से तालु पर लगाना चाहिए। कुछ क्षण बाद लार टपका देनी चाहिए। इससे रोगी के छाले तीसरे दिन में ही सूखना शुरू हो जाएंगे। रोगी को रात में पूरी नींद लेनी चाहिए।

• 5 ग्राम देशी घी में पिसा कत्था और 5 ग्राम धनियां को पीसकर मिला लेना चाहिए। फिर इस मरहम को छालों पर लगाकर लार टपका देनी चाहिए। इससे 2 दिन में छाले सूखने शुरू हो जाते हैं। छालों का इलाज करने से पूर्व यदि पेट को साफ कर लिया जाए तो काफी लाभ होता है। कभी-2 ये छाले आंतों में होने वाली गर्मी से भी हो जाते हैं। छालों के बीच कम नमक का फीका भोजन लेना चाहिए। दूध, नींबू की गर्म शिकंजी, दलिया, साबूदाना आदि का सेवन छालों के लिए काफी लाभकारी रहता है।

• धनिए के बारीक चूर्ण को खाने वाले सोडे़ में मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने से लाभ होता है।

80. मुलेठी-

• मुलेठी के चूर्ण को फूले हुए कत्थे के साथ मिलाकर छालों पर लगाएं और लार बाहर टपकने दें। इससे मुंह की गंदगी खत्म होकर मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

• मुलेठी का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से छाले सूख जाते हैं।

• मुलेठी का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। इसके चूर्ण को थोड़े-से शहद में मिलाकर चाटने से भी आराम होता है।

• मुलेठी को मुंह में रखकर चूसने से छालों में होने वाली जलन और दर्द आदि खत्म हो जाते हैं।

• धनिए के बारीक चूर्ण को खाने वाले सोडे़ में मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने से लाभ होता है।

81. दूब हरी- दूब से तैयार किए हुए काढ़े से दिन में 3-4 बार गरारे करने से मुंह के छालों में लाभ पहुंचता है।

82. कचनार- कचनार की छाल के काढ़े में थोड़ा-सा कत्था मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।

83. फिटकरी :

• फिटकरी को पानी में घोलकर इसके पानी से दिन में 3-4 बार कुल्ला करने से मुंह के छाले व जख्म नष्ट हो जाते हैं।

• आधा चम्मच फिटकरी का चूर्ण और आधा चम्मच इलायची का चूर्ण लेकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद मुंह के छालों पर छिड़कने से आराम मिलता है।

• फिटकरी को फुलाकर नीलाथोथा के साथ मिलाकर कूटकर चूर्ण बना लें। इसके चूर्ण को छालों पर लगाकर लार को नीचे टपकने दें। यह मुंह की गन्दगी को खत्म करके छालों को नष्ट करता है।

• चौथाई चम्मच फिटकरी और आधा चम्मच नमक को लेकर 1 गिलास पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

• फिटकरी को पानी में घोलकर कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

• सफेद फिटकरी और नीला थोथा को बराबर मात्रा में मिला लें। रुई का फोया भिगोकर उस पर 1 ग्राम यह पाउडर डालकर छालों पर 1 मिनट लगाएं रखें और लार थूकते रहें, निगलें नहीं। किसी भी अवस्था में यह पेट में नहीं जाना चाहिए क्योंकि यह मिश्रण जहरीला होता है। यह 2 ग्राम पाउडर 1 गिलास पानी में घोलकर कुल्ला भी कर सकते हैं। अंत में साफ पानी से कुल्ला कर लेते हैं। इससे छालों में तुरन्त ही लाभ मिलता है।

84. कालीमिर्च – 15 ग्राम कालीमिर्च और 30 ग्राम किशमिश को एकसाथ मिलाकर चबाने से मुंह के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।

85. शहद :

• तवे पर सुहागे को फुलाकर शहद के साथ छालों पर लगाने से लाभ मिलता है।

• छोटी इलायची को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण को शहद में मिलाकर मुंह के छालों पर लगायें।

• फिटकरी को पानी में घोल लें और एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर कुल्ला करें। यह कुल्ला भोजन करने से पहले सुबह, दोपहर तथा शाम को करना चाहिए।

• पेट में गर्मी ज्यादा हो तो त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ लेना चाहिए। केवल आंवले का चूर्ण शहद के साथ लेने से भी पेट की गर्मी शांत होती है और मुंह के छाले सही होने लगते हैं।

86. ईसबगोल :

• मुंह के छाले व दानों में 3 ग्राम ईसबगोल की भूसी को मिश्री में मिलाकर हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से रोगी को लाभ होता है।

• ईसबगोल को गर्म पानी में घोलकर दिन में 2 बार कुल्ला करने से कब्ज और छाले समाप्त हो जाते हैं।

• ईसबगोल को पानी में डालकर रख दें। लगभग 2 घंटे के बाद उस पानी को कपड़े में छानकर कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

87. घी 
• 10 ग्राम हल्के गर्म दूध में ढाई ग्राम कपूर चूरा मिलाकर छालों पर मलने से मुंह व जीभ के छाले नष्ट हो जाते हैं।

• रात को सोते समय मुंह में शुद्ध घी भरकर सोने से मुंह के छाले दूर होते हैं



swasth jeevan chhoti chhoti par moti salah

 swasth jeevan chhoti chhoti par moti salah
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पेट में कब्ज अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं मरीज की

 70 प्रतिशत रोग केवल पेट परेशान होते हैं

मांसाहार कुछ रोग केवल मांसाहार से होते है |

 जल पीना भोजन के बाद तुरंत जल पीने से होते हैं।

जल पीना भोजन क 1 घंटे बाद ही जल पीनाचाहिये

चाय रोग चाय पीने से होते हैं।

हृदय रोग  शराब, कोल्डड्रिंक और चाय  के सेवनहोता है।

              

आंतसिकुड़ ठंडे जल (फ्रिज) और आइसक्रीम से बड़ीआंत सिकुड़ जाती है।


आंत सड़ती मैगी, गुटका, शराब, का माँस, पिज्जा, बर्गर,बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।


                     


                     

आँखों को हानि बाल रंगने वाले द्रव्यों (हेयरकलर) सेआँखों को हानि  (अंधापन भी) होती है।



  • दूध (चाय)  के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से  चर्म रोग हो जाता है।


शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों सेबाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।

गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधकशक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।

गर्म जल सिर  पर डालने से आँखें कमजोर होजाती हैं।

खड़े होकर जल पीने से घुटनों (जोड़ों) में पीड़ा होती है




                  

खड़े होकर मूत्र त्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होतीहै


रक्तचाप (ब्लडप्रेशर)  भोजन पकाने के बाद उसमें नमकडालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
  • ·         Swasth Jeevan Rahne ke Upay

लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।

मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।

पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं औरक्षय (टीबी) होने का डर रहता है।

नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है, मलेरिया नहीं होता है।
                

तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।

                

मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त  रहता  है।

अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिएसर्वश्रेश्ठ है।

हृदय,रोगी के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमीसेंधा नमक, गुड़ चोकर युक्त आटा, छिलके- युक्त अनाज औशधियां हैं।

भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है।अपच नहीं होता है।
                      

अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीरस्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।

मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुरहोती है।


जल सदैव ताजा का पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।

नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग)तथा हैजा से बचाता है।

                                     

चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ये इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही  पिसवाना चाहिए।

फल मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।

भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए।उसकेपश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बादपशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।

मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोशकता 100%, कांसे केबर्तन में 97%पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तनऔर प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।

                  

गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा,मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करनाचाहिए।

14 वर्श से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, बे्रड,समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।

खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेश्ठ होता है उसके बाद कालानमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।

जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में सेकुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहींपड़ते।

सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए।देशी घी ही खाना चाहिए है।

रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।

पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखोंकी खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।

खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।

मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी (कच्ची) चीनी का प्रयोगकरना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।

टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करनाचाहिए दाँत मजबूत रहेंगे। (आँखों के रोग में दातून नहीं करना)

यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़े और लिखनेका काम तो न ही करें तो अच्छा है।

निरोग रहने के लिए अच्छी नींद और अच्छा (ताजा) भोजनअत्यन्त आवश्यक है।

देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमजोरहो जाती है भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता है आँखों के रोग भी होते हैं।


  • अम्लपित्त, एसिडिटी, उल्टी,- दस्त, पेट के कीड़े , सबका एक उपाय

                


जीरा,धनिया, और  देशी डोरा वाली मिश्री, तीनों को बराबर मात्रा में मीलाकर पीस लें | इस चूर्ण की २-२ चम्मच सुबह-शाम सादे पानी से लेने पर अम्लपित्त या एसिडिटी ठीक हो जाती है | 
    

              

          
जीरा, सेंधा नमक,काली मिर्च,सौंठ और पीपल सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद ताजे (गुनगुना) पानी से लेने पर अपच में लाभ होता है |

                    

पांच ग्राम जीरे को भूनकर तथा पीसकर दही की लस्सी में मिलाकर सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है |

१५ ग्राम जीरे को ४०० मिली पानी में उबाल लें | जब १०० ग्राम शेष रह जाये तब २०-४० मिली की मात्रा में प्रातः-सांय पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |



एक चम्मच भुने हुए जीरे के बारीक़ चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन भोजन के बाद सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है |

इसमें एंटीसेप्‍टिक तत्‍व भी पाया जाता है, जो कि सीने में जमे हुए कफ को निकाल कर बाहर करता है और सर्दी-जुखाम से राहत दिलाता है। यह गरम ताचिर का  होता है इसलिये यह कफ को बिल्‍कुल अच्‍छी तरह से सुखा देता है।


यदि आप नींद न आने की बीमारी से ग्रस्त हैं तो एक छोटा चम्मच भुना जीरा पके हुए केले के साथ मैश करके रोजाना रात के खाने के बाद खाएं.

जब भी सर्दी-जुखाम हो, तो एक ग्‍लास पानी में जीरा ले कर उबाल लें और इस पानी को पिएं। कई साउथ इंडियन घरों में सादा उबला पानी न पी कर 'जीरा पानी' पिया जाता है।

                  

जीरे को बारीक़ पीस लें | इस चूर्ण का ३-३ ग्राम गर्म पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करने से पेट के दर्द तथा बदन दर्द से छुटकारा मिलता है |

जीरा आयरन का सबसे अच्‍छा स्‍त्रोत है, जिसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर होती है। साथ ही गर्भवती महिलाएं, जिन्‍हें इस समय खून और आयरन की जरुरत होती है, उनके लिये जीरा अमृत का काम करता है।

जीरा खाने से लीवर मजबूत होता है और उसकी शरीर से गंदगी निकालने की क्षमता में भी सुधार आता है।
ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए आघा छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ पीएं। डायबिटीज रोगियों को यह काफी फायदा पहुंचाता है।

" कब्जियत की शिकायत होने पर जीरा, काली मिर्च, सोंठ और करी पावडर को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण तैयार कर लें। इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक डालकर घी में मिलाएं और चावल के साथ खाएं। पेट साफ रहेगा और कब्जियत में राहत मिलेगी।